‘जेडीयू को डुबोने वालों के लिए कहीं कोई जगह नहीं’, आरसीपी सिंह की वापसी पर ललन सिंह का करारा जवाब: बिहार में NDA में नया तनाव?
‘जेडीयू को डुबोने वालों के लिए कहीं कोई जगह नहीं’, आरसीपी सिंह की वापसी पर ललन सिंह का करारा जवाब: बिहार में NDA में नया तनाव?
बिहार की सियासत में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रहे आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की खबरों पर JDU अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने साफ-साफ ‘फुल स्टॉप’ लगा दिया है। ललन सिंह ने कहा, “जेडीयू को डुबोने वालों के लिए पार्टी में कहीं कोई जगह नहीं है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब सूत्रों के हवाले से खबरें चल रही थीं कि नीतीश कुमार के करीबी रहे आरसीपी सिंह NDA में वापसी की कोशिश कर रहे हैं और कुछ JDU नेताओं से संपर्क भी किया है।
क्या है पूरा मामला?
आरसीपी सिंह 2022 में JDU से निष्कासित हो गए थे, जब उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू किया और पार्टी छोड़कर BJP में शामिल हो गए थे। उन्होंने JDU पर ‘नीतीश कुमार के व्यक्तिगत फैसलों’ का आरोप लगाया था।
2024 लोकसभा चुनाव के बाद आरसीपी सिंह ने BJP से भी दूरी बना ली और अब वे निर्दलीय या किसी नई राजनीतिक पहल की बात कर रहे हैं।
हाल ही में पटना में कुछ JDU विधायकों और नेताओं से उनकी मुलाकात की खबरें आईं, जिससे अटकलें लगीं कि वे JDU में वापस लौट सकते हैं – खासकर तब जब नीतीश कुमार फिर से NDA में हैं और महागठबंधन टूट चुका है।
लेकिन ललन सिंह ने आज पटना में मीडिया से बातचीत में साफ कहा, “आरसीपी सिंह जैसे लोग जो पार्टी को कमजोर करने की कोशिश करते हैं, उनके लिए JDU में कोई जगह नहीं बची है। हमारी पार्टी एकजुट है और नीतीश जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है।”
JDU में क्या माहौल?
JDU के कई वरिष्ठ नेता भी इस बात से सहमत हैं कि आरसीपी सिंह की वापसी पार्टी में पुरानी कड़वाहट को फिर से जगा सकती है। 2022 में आरसीपी सिंह के निष्कासन के बाद JDU ने कहा था कि उन्होंने पार्टी अनुशासन तोड़ा और नीतीश कुमार के खिलाफ ‘गद्दारी’ की। अब जब बिहार में NDA सरकार चल रही है और 2025 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, JDU कोई भी आंतरिक कलह नहीं चाहती।
ललन सिंह का यह बयान JDU में ‘एकजुटता’ का संदेश देने वाला है और साथ ही आरसीपी सिंह को साफ संकेत कि उनकी वापसी नामुमकिन है।
राजनीतिक विश्लेषण
अगर आरसीपी सिंह JDU में लौटते, तो यह नीतीश कुमार के लिए ‘पिछला दरवाजा’ खोलने जैसा होता, लेकिन ललन सिंह का सख्त रुख दिखाता है कि पार्टी अब पुराने ‘गद्दारों’ को जगह नहीं देगी।
BJP भी इस मामले में चुप है, क्योंकि आरसीपी सिंह पहले BJP में थे लेकिन अब न तो BJP में हैं और न JDU में।
बिहार की सियासत में यह घटनाक्रम NDA की एकता पर सवाल उठा सकता है, खासकर जब RJD और कांग्रेस महागठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या ललन सिंह का यह ‘फुल स्टॉप’ JDU में स्थायी रहेगा या आरसीपी सिंह कोई नया खेल खेलेंगे? बिहार की राजनीति में हर दिन नया मोड़ आ रहा है। कमेंट में अपनी राय बताएं!
