एआर रहमान के बयान से क्यों मचा है सियासी तूफ़ान? जानिये
एआर रहमान के बयान से क्यों मचा है सियासी तूफ़ान? जानिये
ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के एक हालिया इंटरव्यू ने बॉलीवुड से लेकर राजनीति तक हलचल मचा दी है। बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में रहमान ने कहा कि पिछले 8 सालों में उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री (बॉलीवुड) में काम काफी कम मिला है। उन्होंने इसे “पावर शिफ्ट” (सत्ता में बदलाव) से जोड़ा, जहां अब क्रिएटिव नहीं बल्कि गैर-रचनात्मक लोग फैसले ले रहे हैं। सबसे विवादास्पद हिस्सा ये था जब उन्होंने कहा, “शायद ये सांप्रदायिक मामला (communal thing) भी हो सकता है”।
यह बयान पिछले 8 वर्षों (2018 से अब तक) को इंगित करता है, जो केंद्र में मौजूदा सरकार के कार्यकाल से मेल खाता है। रहमान ने यह भी कहा कि वे अब चुनिंदा प्रोजेक्ट्स (जैसे ‘रामायण’, ‘छावा’, ‘मूनवॉक’) पर फोकस कर रहे हैं और काम की कमी से दुखी नहीं हैं, बल्कि इसे “गुड” मानते हैं। लेकिन उनका इशारा सांप्रदायिक पूर्वाग्रह या धर्म आधारित भेदभाव की ओर था, जिसने तुरंत राजनीतिक बहस छेड़ दी।
क्यों मचा तूफान?
विपक्ष का समर्थन: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान, AAP नेता सौरभ भारद्वाज और पप्पू यादव जैसे नेताओं ने रहमान के बयान का समर्थन किया। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी, कला की स्वतंत्रता और नफरत की राजनीति का नतीजा बताया। वारिस पठान ने कहा कि भाजपा के आने के बाद नफरत फैली है, जिससे ऐसे बयान आ रहे हैं।
भाजपा और दक्षिणपंथी प्रतिक्रिया: भाजपा नेताओं ने बयान को बेबुनियाद बताया और कहा कि इंडस्ट्री में टैलेंट के आधार पर काम मिलता है, कोई भेदभाव नहीं। VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने तीखा हमला बोला—”क्यों इस्लाम कबूल किया? घर वापसी करो, फिर काम मिलेगा।” उन्होंने रहमान पर इंडस्ट्री को बदनाम करने का आरोप लगाया।
बॉलीवुड और संगीतकारों की राय: जावेद अख्तर ने कहा कि उन्होंने कभी भेदभाव नहीं देखा, रहमान का कद बहुत ऊंचा है। शान, शंकर महादेवन और अनूप जलोटा ने भी “कम्युनल एंगल” को खारिज किया। शोभा डे और हरिहरन जैसे लोगों ने भी बहस में हिस्सा लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल: बयान के क्लिप्स तेजी से वायरल हुए, जहां लोग इसे मुस्लिम आर्टिस्ट्स पर दबाव या करियर की गिरावट का बहाना बता रहे हैं। कुछ ने रामायण प्रोजेक्ट पर काम करने के बावजूद उनके बयान को कंट्राडिक्टरी कहा।
यह विवाद कला vs राजनीति, रचनात्मक स्वतंत्रता और सांप्रदायिकता की बहस को फिर से गरमा रहा है। रहमान ने कभी स्पष्ट रूप से किसी पार्टी को निशाना नहीं बनाया, लेकिन इशारा साफ था। अब देखना है कि यह बहस कितनी दूर जाती है—बॉलीवुड में काम की कमी की वजह टैलेंट, पावर डायनेमिक्स है या कुछ और?
