भारत ने ऐपल को दी आखिरी चेतावनी, 3 लाख करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है – CCI का सख्त रुख!
भारत ने ऐपल को दी आखिरी चेतावनी, 3 लाख करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है – CCI का सख्त रुख!
भारत की प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India – CCI) ने अमेरिकी टेक दिग्गज ऐपल को आखिरी चेतावनी दे दी है। CCI ने कहा है कि अगर ऐपल अगले हफ्ते तक जांच में जरूरी जानकारी और जवाब नहीं देती, तो मामला एकतरफा आगे बढ़ाया जाएगा। यह ऐपल के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि कंपनी पर एंटीट्रस्ट (प्रतिस्पर्धा विरोधी) नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं और जुर्माना 38 बिलियन डॉलर (लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) तक पहुंच सकता है!
पूरा मामला क्या है?
शुरुआत: 2022 में Match Group (Tinder की पैरेंट कंपनी) और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने CCI में शिकायत की कि ऐपल अपने ऐप स्टोर और iOS प्लेटफॉर्म पर दबदबा बनाए हुए है। आरोप हैं कि ऐपल डेवलपर्स को अपनी इन-ऐप पेमेंट सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करती है, जिससे 30% तक कमीशन लेती है। इससे डेवलपर्स को नुकसान होता है और बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
CCI की जांच: CCI ने जांच शुरू की और प्रारंभिक निष्कर्ष में कहा कि ऐपल का ऐप स्टोर डेवलपर्स के लिए “अनइवॉइडेबल ट्रेडिंग पार्टनर” है – यानी कोई विकल्प नहीं छोड़ता।
जुर्माने का खतरा: 2023 में कॉम्पिटिशन एक्ट में संशोधन हुआ, जिसके तहत CCI अब कंपनी की ग्लोबल टर्नओवर (दुनिया भर की कमाई) के 10% तक जुर्माना लगा सकती है। ऐपल की ग्लोबल कमाई को देखते हुए यह रकम 38 बिलियन डॉलर (₹3.2 लाख करोड़ के आसपास) तक हो सकती है। पहले जुर्माना सिर्फ भारत वाली कमाई पर लगता था, जो बहुत कम होती।
ऐपल का विरोध: ऐपल ने दिल्ली हाई कोर्ट में इस नए नियम को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि यह “असंवैधानिक, असमानुपाती और मनमाना” है – जांच सिर्फ भारत में हुई है, तो जुर्माना भी सिर्फ भारतीय कमाई पर लगना चाहिए। कोर्ट में अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को है। ऐपल ने CCI से केस रोकने की मांग की, लेकिन CCI ने ठुकरा दिया।
CCI ने क्यों दी लास्ट वॉर्निंग?
ऐपल ने जांच में 1 साल से ज्यादा समय से जवाब देने में देरी की है। कई बार एक्सटेंशन मांगे, लेकिन CCI ने कहा कि “प्रक्रियात्मक अनुशासन” बिगड़ रहा है और जांच में बाधा आ रही है।
CCI का आदेश (31 दिसंबर 2025 का, अब सार्वजनिक): “ऐसी छूट अनिश्चित काल तक नहीं दी जा सकती।” अगर ऐपल अगले हफ्ते तक नहीं जवाब देती, तो CCI बिना कंपनी के जवाब के फैसला सुना सकता है।
यह कदम ऐपल को मजबूर करेगा कि वो या तो सहयोग करे या कोर्ट के फैसले का इंतजार करे – लेकिन देरी से केस और मजबूत हो सकता है।
क्या होगा आगे?
अगर ऐपल सहयोग नहीं करती, तो CCI जल्द ही अंतिम आदेश पास कर सकती है – जिसमें जुर्माना, ऐप स्टोर नियमों में बदलाव (जैसे साइडलोडिंग या थर्ड-पार्टी पेमेंट) की मांग हो सकती है।
यह भारत में बड़े टेक कंपनियों (जैसे Google, Meta) के लिए भी संकेत है कि नियम सख्त होंगे।
ऐपल का कहना है कि वो नियमों का पालन करती है और ऐप स्टोर सुरक्षित प्लेटफॉर्म है। लेकिन CCI का रुख साफ है – भारत में नियम तोड़ने की छूट नहीं मिलेगी।
यह मामला टेक इंडस्ट्री के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकता है। क्या ऐपल झुकेगी या कोर्ट में लड़ेगी? आने वाले हफ्तों में साफ होगा!
