उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की वसूली शुरू
उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की वसूली आज से शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, वायु गुणवत्ता सुधार और सड़क ढांचे के रखरखाव के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की है।
ग्रीन सेस वसूली की शुरुआत: हरिद्वार के नारसन चेक पोस्ट से औपचारिक आगाज
उत्तराखंड सरकार ने इस योजना की औपचारिक शुरुआत हरिद्वार जिले के नारसन चेक पोस्ट से की। पहले दिन यहां बड़ी संख्या में वाहनों की जांच की गई और ग्रीन सेस की वसूली शुरू हुई। यह कदम लंबे समय से चल रही कवायद का नतीजा है, जिसे 1 जनवरी 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी बनाया गया है।
पहले दिन आईं तकनीकी दिक्कतें
व्यवस्था लागू होने के पहले दिन ही परिवहन विभाग को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मुख्य समस्याएं निम्नलिखित रहीं:
नेटवर्क कनेक्टिविटी कमजोर होना
सॉफ्टवेयर में शुरुआती खामियां
इन कारणों से सभी वाहनों से निर्धारित सेस नहीं वसूला जा सका। हालांकि, विभागीय कर्मचारियों ने स्थिति संभालते हुए आंशिक रूप से वसूली का काम जारी रखा। परिवहन विभाग का कहना है कि ये समस्याएं अस्थायी हैं और जल्द ही सिस्टम को पूरी तरह सुचारू कर लिया जाएगा।
पहले दिन की वसूली के आंकड़े (नारसन चेक पोस्ट)
कुल रोके गए वाहन: लगभग 850
सफलतापूर्वक ग्रीन सेस वसूला गया: करीब 650 वाहनों से
बाकी वाहनों से तकनीकी कारणों से शुल्क नहीं लिया जा सका
मुख्य विशेषताएं
वसूली मुख्य रूप से FASTag और ANPR कैमरों के जरिए ऑटोमैटिक होती है।
सेस 24 घंटे के लिए वैध होता है।
पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुधार के लिए प्राप्त राजस्व का उपयोग किया जाएगा।
छूट प्राप्त वाहन
दोपहिया वाहन
इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, CNG और सोलर वाहन
सरकारी वाहन (केंद्र/राज्य)
ट्रैक्टर, ट्रेलर, रोड रोलर, कंबाइन हार्वेस्टर
एंबुलेंस, शव वाहन, फायर टेंडर, सेना के वाहन
उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों को सलाह है कि FASTag में पर्याप्त बैलेंस रखें, क्योंकि अब ज्यादातर मामलों में ऑटोमैटिक कटौती हो रही है। यदि कोई और जानकारी चाहिए, जैसे दरों की पूरी लिस्ट या अपडेट, तो बताएं!
