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‘अर्बन मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर मिलकर काम करेंगे’… PM मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का साझा बयान जारी!

‘अर्बन मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर मिलकर काम करेंगे’… PM मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का साझा बयान जारी!

12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज (Friedrich Merz) की पहली आधिकारिक मुलाकात के दौरान भारत-जर्मनी रिश्तों में नई ऊर्जा आई। दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्बन मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का ऐलान किया। ये बयान भारत-जर्मनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के 25 साल पूरे होने और द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने (वर्तमान $50 बिलियन से ज्यादा) के लक्ष्य के साथ आया है।

मुख्य सहयोग क्षेत्र और ऐलान

ग्रीन अर्बन मोबिलिटी: ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप के तहत दूसरा फेज शुरू। नागपुर मेट्रो रेल, कोच्चि वॉटर ट्रांसपोर्ट और 5 राज्यों में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जाएगा। जर्मनी ने ग्रीन अर्बन मोबिलिटी में अतिरिक्त फंडिंग का वादा किया है।

ग्रीन हाइड्रोजन: इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप लॉन्च। ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन, स्टोरेज, यूज और एक्सपोर्ट पर फोकस। जर्मनी की टेक्नोलॉजी (इलेक्ट्रोलाइजर, स्टोरेज) और भारत की सस्ती रिन्यूएबल एनर्जी से वैल्यू चेन बनाई जाएगी।

सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी: इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी रोडमैप लॉन्च। AI, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और क्वांटम में सहयोग। जर्मनी ने एक्सपोर्ट कंट्रोल्स लिबरलाइज किए हैं, जिससे हाई-टेक प्रोडक्ट्स का ट्रांसफर आसान होगा। भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में जर्मन असिस्टेंस मांगी गई है।

अन्य हाइलाइट्स

डिफेंस और सिक्योरिटी: डिफेंस रोडमैप पर काम, प्रोजेक्ट 75I (सबमरीन) पर चर्चा।

ट्रेड और इन्वेस्टमेंट: जर्मनी 25 CEOs के साथ आया, ट्रेड दोगुना करने का लक्ष्य। Make in India में ज्यादा जर्मन कंपनियां शामिल होंगी।

एजुकेशन और स्किलिंग: जर्मन भाषा को ज्यादा स्कूलों में पढ़ाने का प्लान, जॉइंट/ड्यूल प्रोग्राम्स बढ़ेंगे।

कल्चरल टच: दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम विजिट किया और इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में पतंग उड़ाई!

PM मोदी ने कहा: “हमारी पार्टनरशिप ग्रीन ग्रोथ, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित है।” चांसलर मर्ज ने ट्रेड बढ़ाने और टेक्नोलॉजी शेयरिंग पर जोर दिया। ये मुलाकात 27 जनवरी को होने वाले इंडिया-EU समिट से पहले महत्वपूर्ण है।

आप क्या सोचते हैं — ये सहयोग भारत की ग्रीन और टेक महत्वाकांक्षाओं को कितना बूस्ट देगा? कमेंट में बताएं!

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