IPAC केस में कानूनी जंग तेज: पश्चिम बंगाल सरकार ने SC में दाखिल किया कैविएट, ED भी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
IPAC केस में कानूनी जंग तेज: पश्चिम बंगाल सरकार ने SC में दाखिल किया कैविएट, ED भी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में I-PAC (Indian Political Action Committee) पर ED की छापेमारी के बाद कानूनी और राजनीतिक घमासान चरम पर पहुंच गया है। गुरुवार (8 जनवरी 2026) को कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापेमारी हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और एजेंसी पर TMC के गोपनीय चुनावी डेटा चुराने का आरोप लगाया। अब इस मामले में कानूनी जंग और तेज हो गई है – पश्चिम बंगाल सरकार ने शनिवार (10 जनवरी 2026) को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया, जबकि ED भी शीर्ष अदालत का रुख करने की तैयारी में है।
क्या है कैविएट और क्यों दाखिल की गई?
कैविएट एक पूर्व-सूचना है, जो सुनिश्चित करती है कि अदालत किसी पक्ष के खिलाफ बिना सुने कोई आदेश न पास करे। पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर मांग की है कि ED के किसी भी आवेदन पर राज्य का पक्ष सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब ED कलकत्ता हाई कोर्ट में ममता बनर्जी, पुलिस अधिकारियों और अन्य के खिलाफ CBI जांच की मांग कर चुकी है, आरोप लगाते हुए कि CM ने छापेमारी के दौरान “की एविडेंस” (दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस) जब्त कर लिए।
ED का दावा: छापेमारी 2020 के कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। एजेंसी का कहना है कि कोयला चोरी से आए करीब 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए I-PAC पहुंचे, जो TMC और राज्य सरकार को राजनीतिक सलाह देती है। ED ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने पुलिस की मदद से जांच में बाधा डाली और सबूत हटा दिए।
TMC और ममता का पक्ष
TMC का कहना है कि छापेमारी राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, जिसका मकसद 2026 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की रणनीति, उम्मीदवारों की लिस्ट और इंटरनल डेटा चुराना है। ममता बनर्जी ने रैली में कहा कि वे TMC चेयरपर्सन के रूप में मौके पर पहुंचीं, कोई गलत काम नहीं किया। पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर जब्त डेटा के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की है।
अब क्या होगा?
कलकत्ता हाई कोर्ट में ED और TMC की याचिकाओं पर सुनवाई 14 जनवरी को होगी (शुक्रवार को कोर्ट में भीड़ के कारण स्थगित हुई)।
ED के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना मजबूत है, जहां CBI जांच की मांग हो सकती है।
TMC ने इसे केंद्र की साजिश बताया, जबकि BJP ने ममता पर सबूत छिपाने का आरोप लगाया।
I-PAC मामले ने अब केंद्र-राज्य टकराव को नया रूप दिया है। क्या सुप्रीम कोर्ट इस जंग में फैसला सुना देगा या विवाद और गहराएगा? आने वाले दिन बताएंगे।
