टेक-ऑटो

स्लीपर बस हादसों के बाद केंद्र सरकार सख्त: नए सुरक्षा नियम लागू, अब सिर्फ मान्यता प्राप्त कंपनियां बना सकेंगी बसें

स्लीपर बस हादसों के बाद केंद्र सरकार सख्त: नए सुरक्षा नियम लागू, अब सिर्फ मान्यता प्राप्त कंपनियां बना सकेंगी बसें

नई दिल्ली: देश में स्लीपर कोच बसों में लगातार बढ़ती आग की घटनाओं और दुर्घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पिछले छह महीनों में हुई छह बड़ी आग की घटनाओं में करीब 145 लोगों की जान जा चुकी है। इन दुखद हादसों के बाद केंद्र सरकार ने आखिरकार कड़े कदम उठाते हुए स्लीपर बसों के लिए नए सख्त सुरक्षा नियम लागू कर दिए हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को घोषणा की कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सुविधाएं ही कर सकेंगी। पहले निजी या अनौपचारिक बस बॉडी बिल्डर इन बसों का निर्माण करते थे, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती थी। मंत्री ने कहा, “हम सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेंगे। बस बॉडी निर्माण की मान्यता अब केंद्र सरकार के हाथ में होगी।”

नए नियमों के तहत मौजूदा स्लीपर बसों को भी रेट्रोफिट करना अनिवार्य होगा। इनमें फायर डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट पर हथौड़े, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्रोसिनेस डिटेक्शन सिस्टम (नींद आने पर अलार्म) लगाना जरूरी होगा। सभी बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन करना होगा, जो 1 सितंबर 2025 से लागू है।

जांच में पाया गया कि कई हादसों में इमरजेंसी विंडो खराब या ब्लॉक थीं, फायर सेफ्टी उपकरण गायब थे और स्टाफ को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण नहीं था। गडकरी ने राजस्थान सहित कुछ राज्यों में अनियमितताओं की जांच के लिए पत्र लिखा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सरकार का मानना है कि ये कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकेगा और लंबी दूरी की बस यात्रा को सुरक्षित बनाएगा। यात्रियों से अपील है कि वे केवल मान्यता प्राप्त और सुरक्षित बसों में ही सफर करें।

यह फैसला सड़क सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल जानें बचेंगी बल्कि बस ऑपरेटरों में भी जिम्मेदारी बढ़ेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *