पवन खेड़ा केस: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा; सिंघवी बोले ‘संवैधानिक काउबॉय’ जैसी भाषा, तुषार मेहता ने गिनाए ‘फर्जी पासपोर्ट’ के आरोप
पवन खेड़ा केस: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा; सिंघवी बोले ‘संवैधानिक काउबॉय’ जैसी भाषा, तुषार मेहता ने गिनाए ‘फर्जी पासपोर्ट’ के आरोप
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी और तीखी दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस सुनवाई के दौरान अदालत में शब्दों के बाण चले, जहां खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने असम सरकार की भाषा पर सवाल उठाए, वहीं सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने मामले को देश की सुरक्षा और जालसाजी से जुड़ा गंभीर अपराध बताया।
सिंघवी की दलील: “अंबेडकर कब्र में करवट बदल लेंगे”
पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की शुरुआत की। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘पेड़ा’ और ‘पेलूंगा’ जैसे शब्दों का हवाला देते हुए तीखा हमला बोला:
संवैधानिक मर्यादा: सिंघवी ने कहा, “अगर अंबेडकर को पता चला कि कोई संवैधानिक अधिकारी ‘संवैधानिक काउबॉय’ की तरह ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है, तो वह अपनी कब्र में करवट बदल लेंगे।”
जमानती धाराएं: उन्होंने तर्क दिया कि खेड़ा के खिलाफ लगाई गई धाराएं जमानती (Bailable) हैं, फिर भी उन्हें गिरफ्तार करने की इतनी जिद क्यों?
अदालत पर सवाल: सिंघवी ने कहा कि हाई कोर्ट ने धारा 339 का जिक्र किया जो एफआईआर में भी नहीं थी। उन्होंने सवाल उठाया कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करना ‘सार्वजनिक उपद्रव’ (Public Nuisance) कैसे हो सकता है? क्या इससे दंगे भड़क रहे हैं?
तुषार मेहता का पलटवार: “जाली पासपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय साजिश”
असम सरकार का पक्ष रखते हुए एसजी तुषार मेहता ने मामले को सिर्फ मानहानि तक सीमित रखने से इनकार कर दिया। उन्होंने कोर्ट में चौंकाने वाले दावे किए:
फर्जी दस्तावेज: जांच में पाया गया है कि खेड़ा ने तीन देशों के जाली और मनगढ़ंत पासपोर्ट दिखाए। उन देशों ने भी ऐसे पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया है।
हिरासत में पूछताछ: मेहता ने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि ये फर्जी पासपोर्ट और जाली मुहरें (Seals) कहां से आईं? इसके पीछे किसका मकसद है और क्या यह साजिश देश के बाहर रची गई?
विदेशी दखल: उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी तत्व हमारे स्थानीय चुनावों में दखल दे रहे हैं और खेड़ा जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
बंटी-बबली कमेंट: मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को “बंटी और बबली” कहना और फर्जी नागरिकता के आरोप लगाना गंभीर अपराध है।
अदालत की टिप्पणी और मुख्य कानूनी पेंच
सुनवाई के दौरान जस्टिस जेके माहेश्वरी ने ध्यान दिलाया कि मामले में धारा 338 भी शामिल है, जो “कीमती दस्तावेजों की जालसाजी” से संबंधित है और इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
सिंघवी का तर्क: उन्होंने कहा कि अगर ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिली, तो इस कानून का मकसद ही खत्म हो जाएगा। हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि खेड़ा कहीं भागने वाले नहीं हैं।
असम सरकार का विरोध: सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल राजनीतिक बयानबाजी का मामला नहीं है, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के निर्माण का एक गंभीर आपराधिक मामला है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। अब अदालत तय करेगी कि पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी या उन्हें जांच एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण कर हिरासत में पूछताछ का सामना करना होगा।
