मिशन पंजाब: बंगाल के बाद अब पंजाब में ‘चाणक्य’ की एंट्री, ड्रग्स के खिलाफ यात्रा और ‘ओडिशा फॉर्मूले’ से जीत का प्लान
मिशन पंजाब: बंगाल के बाद अब पंजाब में ‘चाणक्य’ की एंट्री, ड्रग्स के खिलाफ यात्रा और ‘ओडिशा फॉर्मूले’ से जीत का प्लान
पश्चिम बंगाल में धुआंधार रैलियों और करीब 15 दिनों के प्रवास के बाद दिल्ली लौटते ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी अगली बड़ी चुनौती ‘मिशन पंजाब’ पर काम शुरू कर दिया है। अगले साल फरवरी (2026) में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो शाह अब चुनाव तक हर महीने पंजाब का दौरा करेंगे।
मई से शुरू होगा ‘ड्रग्स विरोधी’ अभियान
अमित शाह का मिशन पंजाब इसी साल मई से शुरू होने जा रहा है। इस मिशन का सबसे बड़ा हथियार ‘नशा मुक्ति’ होगा।
जन-जागरूकता यात्रा: बीजेपी पूरे राज्य में ड्रग्स के खिलाफ यात्राएं निकालेगी।
विपक्ष पर हमला: 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) ने ड्रग्स को मुद्दा बनाकर सत्ता हासिल की थी, लेकिन अब बीजेपी इसी मुद्दे पर ‘आप’ सरकार को घेरेगी। बीजेपी का आरोप है कि वर्तमान सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है।
बीजेपी का ‘अकेला चलो’ का संकल्प
बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह पंजाब में अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पार्टी इस बार सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
वोट शेयर का गणित:
शाह ने हाल ही में मोगा की ‘बदलाव रैली’ में कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कुछ आंकड़े पेश किए थे:
2024 लोकसभा चुनाव: पंजाब में बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर 18.56% हो गया (2019 में यह 9.63% था)।
बढ़त वाली सीटें: लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी राज्य की 23 विधानसभा सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रही थी।
सक्सेस मंत्र: शाह का मानना है कि जिन राज्यों में बीजेपी ने 19% वोट शेयर हासिल किया, वहां बाद में उसकी सरकार बनी (जैसे ओडिशा, त्रिपुरा और असम)।
’आप’ में सेंधमारी और समीकरणों का खेल
पंजाब की सियासत में हो रही हलचल बीजेपी के पक्ष में जाती दिख रही है।
अंदरूनी जानकारी: आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों (विशेषकर राघव चड्ढा और संदीप पाठक) के बीजेपी के संपर्क में होने की खबरों से बीजेपी को ‘आप’ की रणनीति समझने में मदद मिल रही है।
नेताओं की एंट्री: कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई दिग्गज नेताओं के जल्द ही बीजेपी में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
विकल्प की तलाश: प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद अकाली दल में पैदा हुए शून्य और कांग्रेस की गुटबाजी के बीच बीजेपी खुद को एक ‘सशक्त विकल्प’ के रूप में पेश कर रही है।
डबल इंजन और सुरक्षा का मुद्दा
सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब में राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। अमित शाह अपनी रैलियों में इसी बात पर जोर देंगे कि एक संवेदनशील सीमाई राज्य को ‘डबल इंजन’ (केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी) की सरकार की जरूरत है, ताकि घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी पर लगाम लगाई जा सके।
निष्कर्ष: बंगाल की थकान मिटाने के बजाय अमित शाह का सीधा पंजाब की ओर रुख करना यह संकेत देता है कि बीजेपी इस बार पंजाब को महज एक ‘प्रतियोगी’ के तौर पर नहीं, बल्कि ‘विजेता’ के तौर पर देख रही है। मई से शुरू होने वाली यात्राएं पंजाब की राजनीतिक फिजा को बदलने का काम करेंगी।
