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ट्रंप का बड़ा दांव: वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी कब्जा, चीन की ऊर्जा सुरक्षा को तगड़ा झटका

ट्रंप का बड़ा दांव: वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी कब्जा, चीन की ऊर्जा सुरक्षा को तगड़ा झटका

वाशिंगटन/काराकास, 7 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद देश के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण की घोषणा कर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर निवेश कर वेनेजुएला की जर्जर तेल को ठीक करेंगी और उत्पादन बढ़ाएंगी। इससे सबसे बड़ा नुकसान चीन को होगा, जो वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार (300 अरब बैरल से ज्यादा) हैं, लेकिन सालों की बदइंतजामी और प्रतिबंधों से उत्पादन गिरकर 9-10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। दिसंबर 2025 में चीन को औसतन 6 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिल रहा था, जो उसके कुल आयात का करीब 4% था। अमेरिकी कार्रवाई के बाद तेल निर्यात अब मुख्य रूप से अमेरिका की ओर मोड़ा जाएगा, जिससे अमेरिकी रिफाइनरियों को फायदा होगा और चीन की ऊर्जा सुरक्षा को झटका लगेगा।

ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि वेनेजुएला अमेरिका को 30-50 मिलियन बैरल तेल (करीब 2 अरब डॉलर का) सौंपेगा, जो सीधे अमेरिकी बंदरगाहों पर भेजा जाएगा। कुछ कार्गो चीन के लिए थे, लेकिन अब उन्हें रीडायरेक्ट किया जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि चीन को कुछ तेल मिलता रहेगा, लेकिन मात्रा सीमित होगी। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों से अपील की कि वे निवेश करें, ताकि पुरानी जब्त संपत्तियों का मुआवजा मिले।

चीन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की। बीजिंग का कहना है कि वेनेजुएला में उसके अरबों डॉलर के निवेश और तेल-ऋण सौदे कानून से संरक्षित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता का नया मोर्चा है, जहां ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत पश्चिमी गोलार्ध में अपना दबदबा कायम कर रहे हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि तेल उत्पादन बढ़ाने में सालों लग सकते हैं और अरबों डॉलर का निवेश चाहिए। वैश्विक तेल कीमतों पर तत्काल असर सीमित रहेगा, क्योंकि 2026 में आपूर्ति पहले से ज्यादा है। लेकिन लंबे समय में यह चीन की ऊर्जा रणनीति और ब्रिक्स गठबंधन को कमजोर कर सकता है।

यह घटनाक्रम वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने वाला साबित हो सकता है – क्या ट्रंप का यह ‘तेल कब्जा’ सफल होगा या अंतरराष्ट्रीय विवाद बढ़ाएगा, यह देखने वाली बात होगी।

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