महायुति में दरारें: BMC और नगर निगम चुनावों में सहयोगी दलों का आमना-सामना
महायुति में दरारें: BMC और नगर निगम चुनावों में सहयोगी दलों का आमना-सामना
मुंबई/पुणे, 7 जनवरी 2026: महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और अन्य 28 नगर निगमों के चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। राज्य सरकार में साथ बैठने वाले भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) कई जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर रहे हैं, जिसे विपक्ष ‘महाभारत’ करार दे रहा है।
BMC चुनावों में भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना ने गठबंधन किया है, जहां भाजपा 137 सीटों पर और शिवसेना 90 सीटों पर लड़ रही है। लेकिन महायुति का तीसरा घटक अजित पवार की एनसीपी अकेले 94 सीटों पर मैदान में है, जिससे करीब 100 सीटों पर महायुति के ही उम्मीदवार आमने-सामने होंगे। पुणे महानगरपालिका में तो स्थिति और जटिल है – यहां तीनों महायुति दल एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं, जबकि अजित पवार और शरद पवार की एनसीपी गुटों ने गठबंधन कर लिया है।
चुनाव प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। अजित पवार ने भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, तो भाजपा नेताओं ने पलटवार किया। पुणे में अजित पवार ने कहा कि स्थानीय चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, इसलिए अलग लड़ना स्वाभाविक है। वहीं, शिंदे गुट और भाजपा के बीच भी सीट बंटवारे को लेकर तनाव की खबरें आईं, हालांकि BMC में समझौता हो गया।
विपक्षी दल इसे महायुति की कमजोरी बता रहे हैं। कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महायुति की सत्ता लिप्सा लोकतंत्र को निगल रही है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे ने 20 साल बाद गठबंधन किया है, जो मराठी अस्मिता के नाम पर वोट मांग रहे हैं।
इन चुनावों में 3.49 करोड़ मतदाता हिस्सा लेंगे, और BMC का बजट 74 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा होने से यह देश की सबसे अमीर नगर निकाय है। परिणाम 16 जनवरी को आएंगे, जो महाराष्ट्र की सियासत की दिशा तय करेंगे। क्या महायुति की एकता बनी रहेगी या आंतरिक लड़ाई विपक्ष को फायदा पहुंचाएगी – यह देखना दिलचस्प होगा।
