वेनेजुएला तेल पर अमेरिकी कंट्रोल: भारत को मिल सकता है 1 अरब डॉलर का फंसा बकाया, प्रोडक्शन भी बढ़ेगा!
वेनेजुएला तेल पर अमेरिकी कंट्रोल: भारत को मिल सकता है 1 अरब डॉलर का फंसा बकाया, प्रोडक्शन भी बढ़ेगा!
नई दिल्ली, 4 जनवरी 2026: अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर अमेरिकी नियंत्रण से भारत को बड़ा फायदा हो सकता है। विशेषज्ञों और इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, इससे करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8,500 करोड़ रुपये) का लंबे समय से फंसा बकाया मिल सकता है, साथ ही भारतीय कंपनियों के ऑपरेटेड फील्ड्स से क्रूड प्रोडक्शन फिर शुरू हो सकता है।
पूरा मामला क्या है?
ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) वेनेजुएला के पूर्वी हिस्से में सैन क्रिस्टोबल ऑयलफील्ड में 40% स्टेक रखती है।
अमेरिकी सैंक्शंस की वजह से प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ – पहले 80,000-1,00,000 बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाला फील्ड अब सिर्फ 5,000-10,000 बैरल ही पैदा कर पाता है।
वेनेजुएला ने OVL को 2014 तक का 536 मिलियन डॉलर डिविडेंड नहीं दिया, और उसके बाद का भी लगभग इतना ही बकाया है (कुल करीब 1 अरब डॉलर)। ऑडिट न होने से क्लेम फ्रीज हो गया।
अमेरिकी सैंक्शंस ने टेक्नोलॉजी, इक्विपमेंट और सर्विसेस की सप्लाई रोक दी, जिससे रिजर्व्स स्ट्रैंडेड हो गए।
अब ट्रंप प्रशासन के तेल सेक्टर पर कंट्रोल और सैंक्शंस में छूट से:
निर्यात फिर शुरू होगा, जिससे फील्ड की रेवेन्यू से OVL अपना बकाया वसूल सकेगी।
अमेरिकी कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक करेंगी, प्रोडक्शन बढ़ेगा।
भारत के लिए वेनेजुएला का हैवी क्रूड सस्ता और स्ट्रैटेजिक ऑप्शन बनेगा (पहले भारत रोज 4 लाख बैरल इंपोर्ट करता था)।
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार (303 अरब बैरल) हैं, लेकिन सैंक्शंस और मिसमैनेजमेंट से प्रोडक्शन गिर गया। अमेरिकी कंट्रोल से ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बढ़ेगी, कीमतें स्थिर रहेंगी। भारत जैसे बड़े इंपोर्टर के लिए यह डाइवर्सिफिकेशन का मौका है।
हालांकि, अभी ट्रांजिशनल गवर्नमेंट और लीगल इश्यूज बाकी हैं। अगर सब ठीक रहा तो OVL और अन्य भारतीय कंपनियां (जैसे काराबोबो-1 प्रोजेक्ट) फिर सक्रिय हो सकती हैं। भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को बूस्ट मिलेगा!
