आज नहीं होगी कोई फूड डिलीवरी: गिग वर्कर्स की हड़ताल, सरकार के सामने रखीं ये 10 प्रमुख मांगें
आज नहीं होगी कोई फूड डिलीवरी: गिग वर्कर्स की हड़ताल, सरकार के सामने रखीं ये 10 प्रमुख मांगें
नए साल की पूर्व संध्या पर बड़ा झटका! फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, जीप्टो, अमेजन और फ्लिपकार्ट के डिलीवरी पार्टनर्स ने देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के नेतृत्व में यह हड़ताल क्रिसमस (25 दिसंबर) के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई है। यूनियंस का दावा है कि 1 लाख से ज्यादा वर्कर्स ऐप से लॉग आउट करेंगे या काम कम करेंगे, जिससे न्यू ईयर ईव पर ऑर्डर्स में भारी देरी हो सकती है।
यह हड़ताल गिग इकोनॉमी में बिगड़ती कामकाजी स्थितियों के खिलाफ है। वर्कर्स लंबे घंटे काम करने, कम आय, असुरक्षित डिलीवरी टारगेट्स और सोशल सिक्योरिटी की कमी से परेशान हैं। 25 दिसंबर की हड़ताल में कई शहरों में 50-60% डिलीवरी प्रभावित हुई थी। अब 31 दिसंबर – साल का सबसे व्यस्त दिन – को टारगेट कर यूनियंस प्लेटफॉर्म कंपनियों और सरकार पर दबाव बढ़ा रही हैं।
हड़ताल का असर: न्यू ईयर पार्टी प्लान्स पर ब्रेक?
न्यू ईयर ईव पर फूड डिलीवरी और ग्रॉसरी ऑर्डर्स में आमतौर पर 60% तक उछाल आता है। लेकिन हड़ताल से दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता जैसे शहरों में देरी या कैंसिलेशन हो सकते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स ने पहले से स्टॉक अप करने की सलाह दी है, जबकि कंपनियां अतिरिक्त इंसेंटिव्स देकर वर्कर्स को रोकने की कोशिश कर रही हैं। जोमैटो और स्विगी ने कहा कि असर न्यूनतम होगा, लेकिन यूनियंस का कहना है – “यह सिर्फ ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाकी है।”
गिग वर्कर्स की 10 प्रमुख मांगें
यूनियंस ने सरकार और प्लेटफॉर्म कंपनियों से ये मांगें रखी हैं:
पारदर्शी और बेहतर वेतन संरचना: प्रति ऑर्डर न्यूनतम पेमेंट फिक्स करें, दूरी और समय के आधार पर। कम से कम ₹20-35 प्रति किमी या प्रति डिलीवरी।
10-मिनट डिलीवरी मॉडल खत्म करें: यह जानलेवा है, सड़क सुरक्षा को खतरा। डिलीवरी टाइम बढ़ाएं।
मनमाने आईडी ब्लॉकिंग और पेनल्टी रोकें: बिना वजह अकाउंट ब्लॉक न करें, अपील का प्रोसेस लागू करें।
सोशल सिक्योरिटी और वेलफेयर: हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर, पेंशन और मैटरनिटी बेनिफिट्स दें। कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी को सख्ती से लागू करें।
न्यूनतम मासिक आय गारंटी: ₹24,000-40,000 तक की गारंटीड इनकम।
सुरक्षा उपकरण और इंश्योरेंस: हेलमेट, रेनकोट जैसे गियर और एक्सीडेंट इंश्योरेंस अनिवार्य।
वर्किंग ऑवर्स और रेस्ट ब्रेक: लंबे घंटों पर रोक, अनिवार्य रेस्ट और रीजनेबल शिफ्ट्स।
प्लेटफॉर्म डिडक्शंस कैप: कमीशन और डिडक्शन 20% से ज्यादा न हो।
ग्राहक कैंसिलेशन का कंपेंसेशन: कैंसिल ऑर्डर पर भी वर्कर को पेमेंट।
यूनियन अधिकार और बातचीत: कलेक्टिव बार्गेनिंग का अधिकार मान्यता दें, सरकार ट्राइपार्टाइट डिस्कशन करे।
यूनियन लीडर शैक सलाउद्दीन ने कहा, “डिलीवरी वर्कर्स प्लेटफॉर्म्स की रीढ़ हैं, लेकिन एल्गोरिदम के गुलाम बना दिए गए हैं। सरकार चुप नहीं रह सकती।” हाल ही में लागू सोशल सिक्योरिटी कोड में प्लेटफॉर्म्स को 1-2% टर्नओवर वेलफेयर फंड में देने का प्रावधान है, लेकिन यूनियंस कहती हैं कि यह काफी नहीं।
आगे क्या?
यह हड़ताल गिग इकोनॉमी की बड़ी चुनौती उजागर कर रही है। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आगे और प्रोटेस्ट हो सकते हैं। ग्राहकों से अपील: पहले से प्लान करें, लोकल ऑप्शंस ट्राई करें। गिग वर्कर्स की लड़ाई न्याय और सम्मान की है – नए साल में उम्मीद है बदलाव आएगा।
