पुणे महानगरपालिका चुनाव: ‘चाचा-भतीजा’ में नहीं बनी बात, शरद पवार की NCP फिर MVA के पास लौटी
पुणे महानगरपालिका चुनाव: ‘चाचा-भतीजा’ में नहीं बनी बात, शरद पवार की NCP फिर MVA के पास लौटी
पुणे, 27 दिसंबर 2025: महाराष्ट्र की सियासत में पुणे महानगरपालिका (PMC) चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर देखने को मिला। शरद पवार और अजित पवार की NCP के दोनों गुटों के बीच गठबंधन की बातचीत टूट गई, जिसके बाद शरद पवार की NCP (शरदचंद्र पवार) फिर से महाविकास अघाड़ी (MVA) के साथ सीट शेयरिंग की चर्चा में लौट आई। कुल 165 सीटों वाले इस चुनाव में अब समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
शुरुआत में दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ निकाय चुनाव साथ लड़ने का ऐलान किया था, जो 2023 के विभाजन के बाद पहला मौका होता। लेकिन सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनी। सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार गुट ने शरद पवार गुट को सिर्फ 35 सीटें ऑफर कीं, वो भी ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर लड़ने की शर्त के साथ। शरद गुट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया, क्योंकि वे अपने ‘तुरही’ चिह्न पर लड़ना चाहते थे। शरद गुट ने 40-45 या इससे ज्यादा सीटें मांगी थीं, जबकि अजित गुट 30 तक देने को तैयार था।
बातचीत टूटने के बाद शरद पवार गुट ने तुरंत MVA सहयोगियों—कांग्रेस और शिवसेना (UBT)—के साथ मीटिंग की। पुणे में कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की सेना ने पहले ही अलग गठबंधन का ऐलान कर दिया था। अब शरद पवार की NCP भी इसी में शामिल होकर BJP और महायुति को चुनौती देगी। कांग्रेस ने साफ कहा कि अजित पवार से गठबंधन ‘अस्वीकार्य’ है।
इस बीच, अजित पवार गुट अकेले या BJP से अलग चुनाव लड़ सकता है। पुणे NCP का गढ़ रहा है, लेकिन 2024 लोकसभा और विधानसभा में महायुति की जीत के बाद अजित गुट मजबूत स्थिति में है। शरद गुट को MVA से नैतिक समर्थन मिलेगा, लेकिन सीटें कम होने से चुनौती बढ़ गई है।
चुनाव 15 जनवरी को हैं, नामांकन की आखिरी तारीख नजदीक है। क्या यह स्थानीय गठबंधन राज्य स्तर पर असर डालेगा? फिलहाल पुणे की सियासत में ‘पवार vs पवार’ का मुकाबला रोचक हो गया है। नजरें अब अंतिम गठबंधनों पर टिकी हैं।
