महाराष्ट्र BMC चुनाव: महायुति के लिए कितना आसान, कितना मुश्किल?
महाराष्ट्र BMC चुनाव: महायुति के लिए कितना आसान, कितना मुश्किल?
मुंबई: महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2026 को होने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव सत्ताधारी महायुति (बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी) के लिए सबसे बड़ी परीक्षा हैं। एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका का नियंत्रण हासिल करना महायुति की प्राथमिकता है, जहां 227 सीटों पर कब्जा करने की जंग है। हालिया नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में महायुति की भारी जीत (288 में 207 अध्यक्ष पद) ने इसे मजबूत स्थिति में ला दिया है, लेकिन मुंबई की स्थानीय राजनीति में चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
आसान क्यों लग रहा है?
महायुति को राज्य विधानसभा (2024) और हालिया स्थानीय चुनावों में मिली जीत का फायदा मिलेगा। बीजेपी की मजबूत संगठन क्षमता, केंद्र-राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार का नैरेटिव और विकास कार्य (कोस्टल रोड, मेट्रो आदि) को भुनाने का प्लान है। विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में फूट—कांग्रेस अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS का गठबंधन हो रहा है। यह बहुकोणीय मुकाबला महायुति को फायदा पहुंचा सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, महायुति को 133 सीटों तक का अनुमान है, जबकि MVA को बिना MNS के सिर्फ 94। सीट बंटवारे में बीजेपी-शिंदे सेना ने 200 सीटों पर सहमति बना ली है, बाकी पर बात चल रही है।
मुश्किल क्यों है?
मुंबई में शिवसेना (अविभाजित) का 25-30 साल का दबदबा रहा है। उद्धव-राज ठाकरे का गठबंधन (145-150 सीटें UBट, 65-70 MNS) मराठी मानुष और हिंदुत्व वोट को एकजुट कर सकता है। कुछ सीटों पर अभी गतिरोध है, लेकिन गठबंधन मजबूत लग रहा है। महायुति में सीट बंटवारा अब भी अटका—शिंदे सेना 100-112 सीट मांग रही, जबकि बीजेपी 140-150 चाहती है। अजित पवार की एनसीपी को भी हिस्सा चाहिए, जिससे ‘फ्रेंडली फाइट’ का खतरा है। मुंबई में अल्पसंख्यक, उत्तर भारतीय और दलित वोट कांग्रेस की सोलो लड़ाई से प्रभावित हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, महायुति को मोमेंटम और संसाधनों का फायदा है, लेकिन ठाकरे ब्रदर्स का इमोशनल अपील और गठबंधन की एकता इसे कड़ी टक्कर दे सकती है। 16 जनवरी को नतीजे बताएंगे कि मुंबई का ‘किला’ किसके हाथ लगता है।
