उत्तराखंड

उत्तराखंड सियासत: असल मुद्दों से भटकाव, AI और पुराने केस बन रहे राजनीतिक हथियार; कांग्रेस-BJP आमने-सामने

देहरादून, 25 दिसंबर 2025: उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों असल मुद्दों से भटककर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और डिजिटल हथियारों की जंग में उलझ गई है। एक तरफ AI जनरेटेड वीडियो का विवाद है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को निशाना बनाया गया, तो दूसरी तरफ तीन साल पुराना अंकिता भंडारी हत्याकांड फिर सुर्खियों में है। दोनों ही मामलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया का दुरुपयोग साफ दिख रहा है, जिससे कांग्रेस और भाजपा के बीच घमासान मचा हुआ है। असल मुद्दे जैसे बेरोजगारी, पलायन, प्रदूषण और विकास कहीं पीछे छूट गए हैं।

AI वीडियो विवाद: हरीश रावत पर BJP का हमला

सबसे ताजा बवाल 18 दिसंबर को उत्तराखंड BJP के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट एक AI जनरेटेड वीडियो से शुरू हुआ। इसमें हरीश रावत की इमेज का इस्तेमाल कर बैकग्राउंड में ‘मजार शरणम गच्छामि’ जैसे ऑडियो जोड़े गए, जिससे कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया गया। BJP ने इसे कांग्रेस की ‘सच्चाई’ बताया, जबकि रावत ने इसे अपनी छवि खराब करने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश करार दिया।

रावत ने BJP से माफी और वीडियो हटाने की मांग की, साथ ही FIR दर्ज कराई। उन्होंने BJP कार्यालय की ओर कूच किया, लाउडस्पीकर से सवाल पूछे और धरना दिया। पुलिस ने बैरियर लगाकर रोका। BJP प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इसे कांग्रेस की ‘ड्रामा’ बताया। यह विवाद AI के राजनीतिक दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बन गया है, जहां फेक कंटेंट से नैरेटिव गढ़ा जा रहा है।

अंकिता भंडारी केस का नया ट्विस्ट: पुराना जख्म हरा

इसी बीच, 2022 का अंकिता भंडारी हत्याकांड फिर गरमाया। पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर वीडियो-अUDIO जारी कर दावा किया कि हत्या में एक VVIP (‘गट्टू’) शामिल था, जिसमें भाजपा के बड़े नेता जैसे दुष्यंत गौतम का नाम जुड़ा। कांग्रेस ने इसे लपेटे में लेकर CBI जांच की मांग की और दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

राठौर ने ऑडियो को AI से बना फर्जी बताया, उर्मिला पर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए और FIR दर्ज कराई। दोनों के खिलाफ हरिद्वार-देहरादून में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। BJP ने इसे कांग्रेस की साजिश बताया, जबकि अंकिता की मां ने सबूत कोर्ट में पेश करने की मांग की। यह मामला व्यक्तिगत विवाद से राजनीतिक रंग ले चुका है।

मुद्दों से भटकाव: जनता का नुकसान

ये दोनों विवाद दिखाते हैं कि उत्तराखंड की राजनीति मुद्दों से कितनी दूर हो गई है। राज्य में युवा पलायन, बेरोजगारी, प्राकृतिक आपदाएं, वन भूमि अतिक्रमण जैसे गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन पार्टियां AI और पुराने केसों में उलझी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में फेक न्यूज और AI डीपफेक राजनीतिक हथियार बन रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।

कांग्रेस आरोप लगाती है कि BJP संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही, जबकि BJP कांग्रेस को साजिश रचने वाली बताती है। जनता इन झगड़ों से ऊब चुकी है और असल विकास चाहती है। आने वाले दिनों में ये घमासान और तेज हो सकता है, लेकिन उम्मीद है कि नेता मुद्दों पर लौटें।

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