ट्रंप का H-1B वीजा ‘बम’ फिर फटा: $100,000 फीस पर कोर्ट की मुहर, टेक कंपनियां सदमे में
ट्रंप का H-1B वीजा ‘बम’ फिर फटा: $100,000 फीस पर कोर्ट की मुहर, टेक कंपनियां सदमे में
वाशिंगटन, 25 दिसंबर 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की H-1B वीजा नीति पर एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। फेडरल जज ने ट्रंप प्रशासन की $100,000 प्रति वीजा फीस को वैध ठहरा दिया, जिससे टेक कंपनियां और भारतीय IT प्रोफेशनल्स में खौफ की लहर दौड़ गई है। यह फीस सितंबर 2025 में लागू की गई थी, जिसके खिलाफ US चैंबर ऑफ कॉमर्स और यूनिवर्सिटीज ने मुकदमा किया था। लेकिन जज बेरिल हॉवेल ने कहा कि राष्ट्रपति को इमिग्रेशन नियंत्रण का व्यापक अधिकार है, और यह नीति अमेरिकी वर्कर्स की रक्षा के लिए है।
ट्रंप ने सितंबर में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर नई H-1B एप्लीकेशंस पर $100,000 फीस लगाई थी, जो पहले मात्र $2,000-5,000 थी। इसका मकसद H-1B का दुरुपयोग रोकना और अमेरिकी नौकरियां बचाना बताया गया। जज ने ट्रंप के दावे को सही ठहराया कि कई कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर सस्ते विदेशी वर्कर्स हायर कर रही हैं। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की बड़ी जीत है, लेकिन टेक इंडस्ट्री के लिए झटका।
अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और गूगल जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जो हजारों H-1B वीजा इस्तेमाल करती हैं। पिछले साल भारत से 71% H-1B लाभार्थी थे। अब नई हायरिंग महंगी हो जाएगी, स्टार्टअप्स तो मुश्किल में पड़ जाएंगे। चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा कि वे निराश हैं और आगे अपील करेंगे। कई राज्यों ने भी अलग मुकदमा किया है।
ट्रंप ने लॉटरी सिस्टम भी खत्म कर हाई-सैलरी वर्कर्स को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे इनोवेशन प्रभावित हो सकता है, लेकिन अमेरिकी वर्कर्स को फायदा। भारतीय IT सेक्टर पर सबसे बड़ा असर, क्योंकि ज्यादातर H-1B भारतीयों के पास हैं। टेक लॉबी ट्रंप को मनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन यह ‘बम’ फूटने से सब उलट गया।
अब देखना यह है कि अपील में क्या होता है, लेकिन फिलहाल ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति बरकरार है।
