संसद परिसर में स्मार्ट गैजेट्स पर सख्ती: स्मार्ट चश्मा, स्मार्ट वॉच और पेन कैमरा पर रोक, सांसदों को जारी हुई एडवाइजरी!
संसद परिसर में स्मार्ट गैजेट्स पर सख्ती: स्मार्ट चश्मा, स्मार्ट वॉच और पेन कैमरा पर रोक, सांसदों को जारी हुई एडवाइजरी!
नई दिल्ली। लोकसभा सचिवालय ने संसद की सुरक्षा और गोपनीयता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बुधवार (24 दिसंबर 2025) को जारी एक बुलेटिन में सभी सांसदों को संसद परिसर में स्मार्ट चश्मा (Smart Spectacles), स्मार्ट वॉच और पेन कैमरा जैसे आधुनिक डिजिटल उपकरणों का उपयोग न करने की सख्त सलाह दी गई है। सचिवालय ने चेतावनी दी कि इन उपकरणों का दुरुपयोग सांसदों की निजी गोपनीयता में सेंध लगा सकता है और संसदीय विशेषाधिकारों (Parliamentary Privileges) का गंभीर उल्लंघन बन सकता है।
एडवाइजरी की मुख्य वजहें:
आजकल बाजार में अत्याधुनिक तकनीक से लैस गैजेट्स की भरमार है। स्मार्ट चश्मे (जैसे Ray-Ban Meta या अन्य AI ग्लासेस) में कैमरा, माइक और रिकॉर्डिंग फीचर्स होते हैं, जो छिपकर वीडियो-ऑडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं। स्मार्ट वॉच में भी लोकेशन ट्रैकिंग, वॉयस रिकॉर्डिंग और कैमरा की सुविधा उपलब्ध है। पेन कैमरा तो जासूसी के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होता है। लोकसभा बुलेटिन में कहा गया है कि ऐसे उपकरणों का गलत इस्तेमाल संसद की कार्यवाही, सांसदों की निजी बातचीत या गोपनीय चर्चाओं को लीक करने का खतरा पैदा कर सकता है। इससे न केवल व्यक्तिगत प्राइवेसी प्रभावित होती है, बल्कि संसद की गरिमा और सुरक्षा पर भी असर पड़ता है।
क्या है संसदीय विशेषाधिकार?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को संसद में बोलने और कार्य करने की स्वतंत्रता मिली है। कोई भी बाहरी हस्तक्षेप या रिकॉर्डिंग इसे भंग कर सकती है। पहले भी संसद में मोबाइल फोन पर रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित है, लेकिन अब वियरेबल डिवाइसेज की बढ़ती लोकप्रियता (खासकर AI स्मार्ट ग्लासेस के भारत लॉन्च के बाद) ने नई चुनौती पैदा की है।
सांसदों को क्या सलाह दी गई?
संसद भवन, कमेटी रूम्स या परिसर में ऐसे डिवाइस न पहनें या इस्तेमाल न करें।
अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति ऐसे गैजेट्स के साथ दिखे तो तुरंत सुरक्षा कर्मियों को सूचित करें।
यह एडवाइजरी सभी सांसदों, स्टाफ और विजिटर्स पर लागू है।
यह कदम संसद की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता बनाने की दिशा में है। हाल के वर्षों में स्पाई गैजेट्स की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे जासूसी या लीक का खतरा ज्यादा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला समय की मांग था, क्योंकि ऐसे डिवाइस सामान्य दिखते हैं लेकिन छिपी क्षमताएं खतरनाक हैं।
सांसदों ने इस एडवाइजरी का स्वागत किया है, हालांकि कुछ ने इसे ‘जरूरी लेकिन असुविधाजनक’ बताया। संसद का शीतकालीन सत्र खत्म हो चुका है, लेकिन यह नियम आगे भी लागू रहेंगे। संसद की सुरक्षा अब हाई-टेक खतरे से निपटने के लिए तैयार है!
