DGCA की सख्ती: इंडिगो को तुर्की से लीज वाले विमान मार्च 2026 के बाद नहीं उड़ाने दिए जाएंगे
DGCA की सख्ती: इंडिगो को तुर्की से लीज वाले विमान मार्च 2026 के बाद नहीं उड़ाने दिए जाएंगे
नागरिक उड्डयन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने इंडिगो एयरलाइंस को बड़ा झटका दिया है। तुर्की से वेट लीज पर लिए गए विमानों के संचालन की अनुमति अब केवल मार्च 2026 तक ही सीमित रहेगी, इसके बाद कोई एक्सटेंशन नहीं मिलेगा। DGCA ने 22 दिसंबर 2025 को स्पष्ट किया कि यह ‘अंतिम एक्सटेंशन’ है और ‘सनसेट क्लॉज’ के तहत आगे कोई राहत नहीं दी जाएगी। यह फैसला भू-राजनीतिक तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद तुर्की के पाकिस्तान समर्थन के बैकड्रॉप में आया है।
इंडिगो फिलहाल तुर्की की दो एयरलाइंस से कुल सात विमान वेट/डैम्प लीज पर चला रही है। इनमें तुर्की की कोरेंडन एयरलाइंस से पांच नैरो-बॉडी बोइंग 737 विमान शामिल हैं, जिनकी लीज 31 मार्च 2026 को खत्म हो जाएगी। वहीं, तुर्किश एयरलाइंस से दो वाइड-बॉडी बोइंग 777 विमान फरवरी 2026 के अंत तक ही चलाए जा सकेंगे। ये 777 विमान दिल्ली और मुंबई से इस्तांबुल की फ्लाइट्स पर इस्तेमाल हो रहे हैं। DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इंडिगो को तुर्की से वेट लीज विमानों के लिए मार्च 2026 तक अंतिम अनुमति दी गई है। यह इंडिगो के उस अंडरटेकिंग पर आधारित है जिसमें उन्होंने फरवरी 2026 तक लॉन्ग-रेंज एयरबस A321-XLR की डिलीवरी का हवाला दिया।”
यह मामला मई 2025 से सुर्खियों में है, जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया और भारत की कार्रवाई की निंदा की। तब DGCA ने इंडिगो की तुर्किश एयरलाइंस से लीज एक्सटेंशन की मांग को पहले खारिज कर दिया था, लेकिन यात्रियों की असुविधा से बचने के लिए तीन महीने की मोहलत दी। अगस्त में छह महीने की एक्सटेंशन मिली, लेकिन अब साफ कर दिया गया कि आगे कोई छूट नहीं। मीडिया में चल रही अटकलों पर DGCA ने कहा कि मार्च के बाद तुर्की लीज विमानों का संचालन बंद हो जाएगा।
इंडिगो कुल 15 विदेशी विमान वेट/डैम्प लीज पर चला रही है, जिनमें तुर्की के अलावा नॉर्वे, कतर और लातविया की एयरलाइंस से भी शामिल हैं। यह व्यवस्था Pratt & Whitney इंजन समस्या से ग्राउंडेड विमानों और OEM से डिलीवरी डिले के कारण अपनाई गई है। DGCA ने जोर दिया कि वेट लीजिंग ग्लोबल एविएशन में सामान्य प्रैक्टिस है, लेकिन भारतीय एयरलाइंस को अपनी क्षमता बढ़ानी चाहिए। स्पाइसजेट भी 17 विदेशी लीज विमान चला रही है।
इस फैसले से इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ सकता है, खासकर इस्तांबुल रूट पर। एयरलाइन को अब अपनी A321-XLR या अन्य विकल्पों पर निर्भर रहना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने का संकेत है, जबकि ऑपरेशनल जरूरतों का भी ध्यान रखा गया। इंडिगो ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन आने वाले महीनों में फ्लीट प्लानिंग में बदलाव तय है। एविएशन सेक्टर में यह घटना भू-राजनीति और बिजनेस के टकराव का उदाहरण बन गई है।
