Friday, June 26, 2026
धर्म

साल की आखिरी एकादशी: 30 या 31 दिसंबर, कब रखें पौष पुत्रदा एकादशी व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व

साल की आखिरी एकादशी: 30 या 31 दिसंबर, कब रखें पौष पुत्रदा एकादशी व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2025 की आखिरी एकादशी पौष पुत्रदा एकादशी है। यह भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जो संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष देने वाला माना जाता है। इस बार एकादशी तिथि दो दिनों तक रहने से भक्तों में कन्फ्यूजन है कि व्रत 30 दिसंबर को रखें या 31 दिसंबर को। आइए जानते हैं सही तारीख और मुहूर्त।

सही तारीख: 30 या 31 दिसंबर?

पंचांग के अनुसार, पौष मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7:50 बजे शुरू होगी और 31 दिसंबर 2025 को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी।

उदय तिथि (सूर्योदय के समय वाली तिथि) के नियम से अधिकांश भक्त 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को व्रत रखेंगे, क्योंकि 30 दिसंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहेगी।

कुछ जगहों पर परंपरा के अनुसार 31 दिसंबर को भी व्रत रखा जा सकता है, लेकिन मुख्य रूप से 30 दिसंबर को ही पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत मान्य है।

शुभ मुहूर्त और पारण समय

एकादशी तिथि आरंभ: 30 दिसंबर 2025, सुबह 7:50 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 31 दिसंबर 2025, सुबह 5:00 बजे

व्रत पारण मुहूर्त: 31 दिसंबर 2025 को दोपहर 1:26 बजे से 3:31 बजे तक (द्वादशी तिथि में)

इस बार एकादशी पर भरणी नक्षत्र और सिद्ध योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो व्रत का फल दोगुना करने वाला है।

पूजा विधि और महत्व

पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत संतानहीनों के लिए विशेष फलदायी है। मान्यता है कि इस व्रत से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और पितरों को मोक्ष मिलता है।

सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।

फल, फूल, तुलसी पत्र अर्पित करें।

मंत्र जाप: “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

दिनभर फलाहार या निराहार रहें, शाम को विष्णु पूजा और आरती करें।

रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन करें।

अगले दिन पारण के समय ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें।

यह साल की अंतिम एकादशी है, इसलिए इसे विशेष श्रद्धा से रखने से नए साल की शुरुआत शुभ होती है। पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान से सलाह लेकर व्रत रखें। भगवान विष्णु सभी की मनोकामनाएं पूरी करें!

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