माघ मेला 2026: कल्पवास 3 जनवरी से शुरू, नोट करें संगम स्नान की प्रमुख तिथियां और नियम
माघ मेला 2026: कल्पवास 3 जनवरी से शुरू, नोट करें संगम स्नान की प्रमुख तिथियां और नियम
प्रयागराज, 21 दिसंबर 2025: हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माघ मेला 2026 का आयोजन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर होगा। यह मेला पौष पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलेगा, यानी 3 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक। इस दौरान लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करेंगे। माघ मास में स्नान-दान का विशेष महत्व है, मान्यता है कि इससे पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कल्पवास की शुरुआत: कल्पवास भी 3 जनवरी 2026 (पौष पूर्णिमा) से शुरू होगा। कल्पवासी संगम तट पर टेंट में रहकर एक माह तक कठोर साधना करते हैं। इस साल कल्पवास की अवधि लगभग 29-30 दिन की होगी, जो माघ पूर्णिमा (1 फरवरी) तक मुख्य रूप से मनाई जाती है। कल्पवास करने से सौ कल्पों की तपस्या का फल मिलता है, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है।
संगम स्नान की प्रमुख तिथियां (मुख्य शाही/पवित्र स्नान):
3 जनवरी 2026: पौष पूर्णिमा – मेला और कल्पवास की शुरुआत, पहला स्नान।
14 जनवरी 2026: मकर संक्रांति – दूसरा प्रमुख स्नान (सूर्य का मकर राशि में प्रवेश)।
18 जनवरी 2026: मौनी अमावस्या – सबसे महत्वपूर्ण स्नान, मौन रखकर डुबकी लगाई जाती है।
23 जनवरी 2026: बसंत पंचमी – चौथा स्नान, सरस्वती पूजा का दिन।
1 फरवरी 2026: माघ पूर्णिमा – पांचवां स्नान, कल्पवासियों का मुख्य स्नान।
15 फरवरी 2026: महाशिवरात्रि – अंतिम स्नान, मेले का समापन।
कल्पवास और स्नान के मुख्य नियम:
कल्पवासी सादा जीवन जीते हैं: जमीन पर सोना, सात्विक भोजन (एक समय फलाहार या सादा भोजन), ब्रह्मचर्य पालन।
रोजाना संगम स्नान, जप-तप, कीर्तन और प्रवचन में भाग लेना।
क्रोध, झूठ, मांस-मदिरा से दूर रहना; दान-पुण्य करना शुभ।
स्नान से पहले संकल्प लें, मौन रखें (खासकर मौनी अमावस्या पर)।
महिलाएं मासिक धर्म में स्नान न करें; सूर्योदय से पहले स्नान श्रेष्ठ।
कल्पवास समाप्ति पर सत्यनारायण कथा, ब्राह्मण भोज और दान अवश्य करें।
यह मेला आस्था और साधना का अनुपम संगम है। प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें सुरक्षा और सुविधाएं शामिल हैं। यदि आप जा रहे हैं, तो पहले से बुकिंग कर लें। संगम की पवित्र डुबकी से जीवन धन्य हो!
