यूपी में मतदाता सूची संशोधन से पहले क्यों भड़की सियासी जंग, वोटरों की संख्या घटने से किसे होगा फायदा?
यूपी में मतदाता सूची संशोधन से पहले क्यों भड़की सियासी जंग, वोटरों की संख्या घटने से किसे होगा फायदा?
लखनऊ, 19 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश में विशेष सारांश संशोधन (SSR) रिपोर्ट आने से पहले ही राजनीतिक बवाल मच गया है। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम काटे जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। SSR प्रक्रिया के तहत हर साल मतदाता सूची अपडेट की जाती है, लेकिन इस बार रिपोर्ट जारी होने से पहले ही लाखों वोटरों के नाम हटने की खबरों ने हंगामा खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस ने इसे सत्ताधारी भाजपा की साजिश बताया है, जबकि भाजपा ने इसे रूटीन प्रक्रिया करार दिया।
घटना की शुरुआत नवंबर में हुई, जब चुनाव आयोग ने SSR के लिए दावे-आपत्तियां मांगी थीं। रिपोर्ट जनवरी 2026 में आने वाली है, लेकिन प्रारंभिक आंकड़ों में 20 लाख से ज्यादा वोटरों की संख्या घटने की बात सामने आई। SP प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट कर कहा, “यह अल्पसंख्यक और गरीब वोटरों को लक्ष्य करके किया जा रहा है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव में फायदा मिले।” कांग्रेस ने भी EC से स्पष्टीकरण मांगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नाम हटने के पीछे आधार लिंकिंग, मृतक/डुप्लीकेट नाम और प्रवासी वोटरों का माइग्रेशन मुख्य कारण हैं। लेकिन विपक्ष का दावा है कि यह चुनिंदा इलाकों में हो रहा है, जहां उनका वोट बैंक मजबूत है।
वोटर घटने का फायदा किसे? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर नाम कटने से विपक्षी इलाकों में वोटर कम होते हैं, तो भाजपा को फायदा मिल सकता है। पिछले चुनावों में टाइट सीटों पर 1-2% वोटर ड्रॉप निर्णायक साबित होता है। EC ने सफाई दी कि प्रक्रिया पारदर्शी है और कोई पक्षपात नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “यह फर्जी वोटरों को हटाने का कदम है, जो चुनाव को स्वच्छ बनाएगा।” बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने से मामला और गर्माया है। विपक्ष ने राज्यव्यापी प्रदर्शन की धमकी दी है। यह विवाद 2027 चुनाव की दिशा तय कर सकता है।
