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दिल्ली-NCR में सांसों का संकट: क्यों नहीं थम रहा प्रदूषण का कहर? कहां हो रही सबसे बड़ी चूक?

दिल्ली-NCR में सांसों का संकट: क्यों नहीं थम रहा प्रदूषण का कहर? कहां हो रही सबसे बड़ी चूक?

नई दिल्ली, 17 दिसंबर 2025: दिल्ली-NCR एक बार फिर घने स्मॉग की चपेट में है। आज सुबह का औसत AQI 328-378 के बीच ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ कैटेगरी में दर्ज किया गया, जबकि कुछ इलाकों जैसे आनंद विहार में 341 और अशोक विहार में 350 तक पहुंचा। पिछले हफ्ते AQI 460 तक जा चुका है, जिससे फ्लाइट्स डिले, सांस की बीमारियां बढ़ीं और स्कूल ऑनलाइन शिफ्ट हुए। GRAP-4 के सख्त नियम लागू हैं, फिर भी राहत नहीं मिल रही। आखिर क्यों?

मुख्य कारण: सर्दियों का ‘प्रदूषण जाल’

तापमान उलटाव (Temperature Inversion): सर्दी में ठंडी हवा नीचे और गर्म ऊपर फंस जाती है, जिससे प्रदूषक फैल नहीं पाते। कम हवा की स्पीड और ह्यूमिडिटी स्मॉग को घना बनाती है।

स्थानीय उत्सर्जन का बोझ: 2025 में पराली जलाने की घटनाएं 90% तक घटीं, योगदान सिर्फ 2-5% रहा। असली विलेन वाहन (15-17%), कंस्ट्रक्शन डस्ट, इंडस्ट्री, कचरा जलाना और ओपन फायर्स हैं। दिल्ली में 1.5 करोड़ वाहन, लगातार बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स और अवैध इंडस्ट्रीज प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।

सबसे बड़ी चूकें कहां?

GRAP का कमजोर क्रियान्वयन: स्टेज-4 में कंस्ट्रक्शन बैन, ट्रक एंट्री रोक और WFH है, लेकिन इंफोर्समेंट टोकन मात्र। अवैध यूनिट्स सील होने की बजाय बढ़ रही हैं।

राज्यों में तालमेल की कमी: NCR के सभी राज्य (दिल्ली, हरियाणा, UP, राजस्थान) अलग-अलग काम कर रहे। लोकल एमिशन्स कंट्रोल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस नहीं।

लंबे समय की प्लानिंग नदारद: वाहनों की संख्या बढ़ रही, पुराने व्हीकल्स सड़कों पर, PNG स्विचओवर अधूरा। क्लाउड सीडिंग जैसे प्रयोग फेल हो रहे।

जागरूकता और डेटा में खामी: कभी-कभी मॉनिटरिंग स्टेशंस का डेटा मैनिपुलेट होने के आरोप।

निष्कर्ष: यह संकट मौसमी नहीं, सालभर की चूकों का नतीजा है। विशेषज्ञ कहते हैं – लोकल एमिशन्स कंट्रोल, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सख्त इंफोर्समेंट और NCR स्तर पर कोऑर्डिनेशन से ही राहत मिलेगी। तब तक मास्क पहनें, इंडोर रहें और डॉक्टर से सलाह लें। उम्मीद है हवा की स्पीड बढ़ने से जल्द सुधार हो!

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