देहरादून: पालतू कुत्तों के लिए नई ‘श्वान लाइसेंस उपविधि 2025’ तैयार, सख्त नियम लागू होने वाले
देहरादून: पालतू कुत्तों के लिए नई ‘श्वान लाइसेंस उपविधि 2025’ तैयार, सख्त नियम लागू होने वाले
देहरादून नगर निगम ने पालतू कुत्तों, खासकर आक्रामक (खूंखार) नस्लों को नियंत्रित करने के लिए श्वान लाइसेंस उपविधि 2025 का ड्राफ्ट तैयार किया है। यह उपविधि सोमवार (15 दिसंबर 2025) को प्रकाशित कर दी गई है। अब एक महीने तक दावे-आपत्तियां मांगी गई हैं, जिनके निस्तारण के बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और शहर में कुत्तों के काटने व भौंकने की बढ़ती शिकायतों के बाद उठाया गया है।
मुख्य प्रावधान:
पंजीकरण अनिवार्य: 3 महीने या उससे अधिक उम्र के हर पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण जरूरी। वैधता 1 वर्ष की।
शुल्क:
सामान्य (घरेलू नॉन-ब्रीडिंग) कुत्ते: ₹500 प्रति कुत्ता।
आक्रामक नस्लें (पिटबुल, रॉटवाइलर, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग आदि): ₹2000 प्रति कुत्ता।
लावारिस कुत्तों को गोद लेने पर शुल्क माफ।
अनिवार्य दस्तावेज:
एंटी-रेबीज टीकाकरण प्रमाणपत्र।
आक्रामक नस्लों के लिए 1 साल की उम्र के बाद ABC सर्जरी (नसबंदी) प्रमाणपत्र।
अन्य नियम:
विदेशी आक्रामक नस्लों की ब्रीडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित।
आक्रामक कुत्ते पालने के लिए कम से कम 300 वर्ग गज क्षेत्रफल वाला घर जरूरी।
सार्वजनिक जगहों पर कुत्ते को ले जाते समय चेन और मुंह बंद (मजल) अनिवार्य।
रात में भौंकना, खुले में शौच कराना या बिना पट्टे घुमाना प्रतिबंधित।
उल्लंघन पर सजा:
कुत्ते के काटने पर: भारी जुर्माना (शुरुआती ₹5000), बार-बार शिकायत पर मुकदमा (FIR) और कुत्ता जब्त।
भौंकने से पड़ोसी परेशान: ₹2000 से ₹1 लाख तक जुर्माना।
बिना पंजीकरण पालना या टीकाकरण न कराना: लाइसेंस निरस्त, कानूनी कार्रवाई।
5 या अधिक कुत्ते पालने पर: निजी शेल्टर अनिवार्य, उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड की अनुमति और ₹1000 वार्षिक शुल्क।
नगर निगम की वेबसाइट (nagarnigamdehradun.com) पर पहले से डॉग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध हैं। नए नियम लागू होने के बाद पालतू कुत्ता मालिकों को जल्द पंजीकरण कराना चाहिए। यह नियम शहर में सुरक्षा और स्वच्छता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।
