बरमूडा ट्रायंगल का नया रहस्य: धरती के नीचे मिली अनोखी चट्टान की परत, वैज्ञानिक हैरान
बरमूडा ट्रायंगल का नया रहस्य: धरती के नीचे मिली अनोखी चट्टान की परत, वैज्ञानिक हैरान
अटलांटिक महासागर, 16 दिसंबर 2025: बरमूडा ट्रायंगल – वो रहस्यमयी इलाका जहां दर्जनों जहाज और विमान बिना निशान गायब हो गए। फ्लोरिडा, प्यूर्टो रिको और बरमूडा द्वीप को जोड़ने वाले इस त्रिकोण में सदियों से अलौकिक शक्तियों, एलियंस और अटलांटिस की कहानियां प्रचलित हैं। लेकिन अब एक नई वैज्ञानिक खोज ने सबको चौंका दिया है – बरमूडा द्वीप के ठीक नीचे 20 किलोमीटर मोटी एक अनोखी चट्टान की परत मिली है, जो पृथ्वी पर कहीं और नहीं देखी गई।
कार्नेगी साइंस के सीस्मोलॉजिस्ट डॉ. विलियम फ्रेज़र और येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफ्री पार्क ने दूरस्थ भूकंपों से निकली सीस्मिक वेव्स का अध्ययन किया। बरमूडा में लगे स्टेशन के डेटा से पता चला कि समुद्री क्रस्ट के नीचे मेंटल की बजाय एक राफ्ट जैसी कम घनत्व वाली परत है। यह परत द्वीप को करीब 500 मीटर ऊपर उठाए रखती है, जबकि 31 मिलियन साल पहले की ज्वालामुखी गतिविधि के बाद इसका उभार खत्म हो जाना चाहिए था।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज बरमूडा के भूगर्भीय रहस्य को सुलझाती है, न कि जहाज-विमानों के गायब होने को। गायब होने की घटनाओं के पीछे रॉग वेव्स (विशाल लहरें), मीथेन गैस बबल्स, खराब मौसम और मानवीय गलतियां मुख्य कारण हैं। NOAA और लॉयड्स ऑफ लंदन जैसे संस्थान कहते हैं कि यहां दुर्घटनाओं की दर दुनिया के अन्य हिस्सों जितनी ही है।
फिर भी, यह नई परत पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स और प्राचीन सुपरकॉन्टिनेंट पैंगिया के ब्रेकअप से जुड़ी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि असली रहस्य सतह पर नहीं, धरती की गहराई में छिपा है। यह खोज भूविज्ञान की किताबें बदल सकती है, लेकिन बरमूडा ट्रायंगल की लोककथाएं शायद यूं ही जारी रहेंगी।
