दिल्ली-NCR की जहरीली हवा: सांसों पर संकट, अस्थमा-COPD दवाओं की बिक्री तीन साल के रिकॉर्ड पर!
दिल्ली-NCR की जहरीली हवा: सांसों पर संकट, अस्थमा-COPD दवाओं की बिक्री तीन साल के रिकॉर्ड पर!
नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025: दिल्ली-NCR में सर्दी का मौसम आते ही हवा फिर से बन गई है जहर की। आज एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 226 तक पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। बाजारों में धुंध की चादर बिछी हुई है, सड़कों पर विजिबिलिटी घटकर 50 मीटर रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 का स्तर WHO की सीमा से 10 गुना ज्यादा है, जो फेफड़ों को सीधा नुकसान पहुंचा रहा है। लेकिन इस जहरीली हवा का सबसे बड़ा असर दिख रहा है दवा बाजार पर—अस्थमा और COPD (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) की दवाओं की बिक्री नवंबर में तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
फार्मास्युटिकल मार्केट इंटेलिजेंस फर्म Pharmatrac के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में सांस संबंधी दवाओं का हिस्सा कुल दवा बिक्री का 8 प्रतिशत हो गया, जो पिछले महीनों से 20-25% ज्यादा है। इन्हें inhalers, bronchodilators और steroids शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि OPD में सांस की बीमारियों के मरीज 30% बढ़ गए हैं, खासकर बच्चे और बुजुर्ग। लैंसेट की एक स्टडी में खुलासा हुआ कि प्रदूषण से भारत में सालाना 15 लाख मौतें हो रही हैं, लेकिन सरकार का दावा है कि ‘कोई सीधी डेटा नहीं’। फिर भी, फार्मा ट्रेंड्स साफ बता रहे हैं कि हवा का जहर असल में घातक है।
इस साल जनवरी-नवंबर में AQI औसतन 187 रहा, जो 8 साल का सबसे अच्छा है (कोविड के अलावा), लेकिन दिसंबर में स्टबल बर्निंग और वाहनों से फिर उछाल आ गया। CAQM ने GRAP स्टेज-3 लागू कर निर्माण बंद किया, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि NCR राज्यों का समन्वय कमजोर है।
डॉक्टर्स सलाह दे रहे हैं: घर पर रहें, N95 मास्क यूज करें, ह्यूमिडिफायर चलाएं और विटामिन C से भरपूर डाइट लें। लेकिन लंबे समाधान के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और इंडस्ट्री शिफ्ट जरूरी। क्या इस बार प्रदूषण पर काबू पाएगा प्रशासन, या फिर 2026 में भी यही कहर जारी रहेगा? दिल्लीवासी सांस रोके इंतजार कर रहे हैं!
