दिल्ली EV पॉलिसी 2.0: 50% सब्सिडी, चार्जिंग नेटवर्क विस्तार और बैटरी रीसाइक्लिंग से ग्रीन मोबिलिटी को बूस्ट!
दिल्ली EV पॉलिसी 2.0: 50% सब्सिडी, चार्जिंग नेटवर्क विस्तार और बैटरी रीसाइक्लिंग से ग्रीन मोबिलिटी को बूस्ट!
नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025: दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को बढ़ावा देने के लिए EV पॉलिसी 2.0 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। यह नई नीति चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में EV वैन को मजबूत करने पर केंद्रित है। मौजूदा पॉलिसी के तहत दिल्ली में EV रजिस्ट्रेशन 2020 से 2024 तक 10 गुना बढ़ा है, लेकिन चार्जिंग पॉइंट्स की कमी और बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट चुनौती बने हुए हैं। अब सरकार इन समस्याओं का समाधान करने को बेताब है, ताकि 2030 तक 25% वाहन इलेक्ट्रिक हो सकें।
पॉलिसी का सबसे आकर्षक हिस्सा है वाहनों को EV में कन्वर्ट करने पर 50% तक सब्सिडी। यह छूट गाड़ी की मार्केट वैल्यू के आधार पर होगी, जिससे पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलना आसान हो जाएगा। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने कहा, “यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा, बल्कि मध्यम वर्ग के लिए EV एडॉप्शन को किफायती बनाएगा।” कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह लागू होगा। इसके अलावा, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए EV वैन को प्रोत्साहित किया जाएगा, जो डिलीवरी और लोकल ट्रांसपोर्ट को हरा-भरा बनाएगा।
चार्जिंग नेटवर्क पर बड़ा फोकस है। दिल्ली में मौजूदा 5,000 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन हैं, लेकिन पॉलिसी में इन्हें दोगुना करने का लक्ष्य है। हाईवे पर हर 25 किमी पर स्टेशन लगाने का प्लान है, जैसा कि महाराष्ट्र EV पॉलिसी 2025 में लागू है। केंद्र सरकार की PM E-DRIVE स्कीम के तहत 72,000 नए पब्लिक चार्जिंग पॉइंट्स का लक्ष्य 2025-26 तक है, जिसमें दिल्ली को बड़ा हिस्सा मिलेगा।
बैटरी रीसाइक्लिंग पर पहली बार संरचित सिस्टम लाने का ऐलान हुआ है। लिथियम-आयन बैटरी वेस्ट को कलेक्शन, रीसाइक्लिंग और सुरक्षित डिस्पोजल के जरिए मैनेज किया जाएगा। बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2022 के तहत मार्च 2025 से अनिवार्य है, जहां मैन्युफैक्चरर्स को 70% बैटरी रीसाइक्लिंग का टारगेट पूरा करना होगा। दिल्ली में OEMs जैसे टाटा और ओला इलेक्ट्रिक बैटरी टेक-बैक प्रोग्राम चला रहे हैं, जो रीसाइक्लिंग में 30% से ज्यादा योगदान दे रहे हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान कम होगा और दुर्लभ मेटल्स का दोबारा इस्तेमाल संभव बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पॉलिसी दिल्ली को EV हब बना सकती है, लेकिन सफलता के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और जागरूकता जरूरी। क्या यह नीति दिल्ली की जहरीली हवा को साफ करने में कामयाब होगी? सरकार का जवाब है—हां, ग्रीन फ्यूचर अब करीब है!
