पाकिस्तान का ‘टुकड़े-टुकड़े’ प्लान: आसिम मुनीर की साजिश या बिखराव की शुरुआत? सिंध-बलूचिस्तान में सुलग रहा विद्रोह
पाकिस्तान का ‘टुकड़े-टुकड़े’ प्लान: आसिम मुनीर की साजिश या बिखराव की शुरुआत? सिंध-बलूचिस्तान में सुलग रहा विद्रोह
पाकिस्तान की सेना प्रमुख आसिम मुनीर के कथित ‘टुकड़े-टुकड़े’ प्लान ने देश के चारों प्रांतों—पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा—में तूफान खड़ा कर दिया है। सरकार का दावा है कि मौजूदा चार प्रांतों को 12 छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना प्रशासनिक सुविधा के लिए जरूरी है, लेकिन विशेषज्ञ इसे ‘बांटो और राज करो’ की साजिश बता रहे हैं। खासकर सिंध और बलूचिस्तान में जहां आजादी की मांग जोर पकड़ रही है, क्या ये प्रांत मुनीर के प्लान को स्वीकार करेंगे या देश को 1971 जैसा बिखराव न्योता देंगे?
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अब्दुल अलीम खान ने हाल ही में घोषणा की कि पंजाब को नॉर्थ, सेंट्रल और साउथ पंजाब में, सिंध को तीन हिस्सों में, बलूचिस्तान को तीन और खैबर पख्तूनख्वा को तीन प्रांतों में बांटा जाएगा। उनका तर्क है कि इससे स्थानीय मुद्दों का बेहतर समाधान होगा, लेकिन विपक्षी दलों और राष्ट्रवादी समूहों का कहना है कि यह सेना का विद्रोह दबाने का हथियार है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव शहबाज शरीफ सरकार के सहयोगी दलों जैसे एमक्यूएम-पी और आईआईपी का समर्थन प्राप्त है, लेकिन पीपीपी (बिलावल भुट्टो की पार्टी) सिंध के बंटवारे के खिलाफ है।
सिंध में हालात सबसे नाजुक हैं। सोशल मीडिया पर #Sindhudesh और #FreeSindh ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग मुनीर के प्लान को ‘आजादी की दावत’ बता रहे हैं। सिंधी राष्ट्रवादी नेता शाफी बुरफत ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि पाकिस्तान का ‘रेडिकलाइज्ड मिलिट्री स्ट्रक्चर’ सिंध और बलूचिस्तान को न्यूक्लियर साइट्स के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जो लाखों लोगों को खतरे में डाल रहा है। कराची में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां जेएसएसएम जैसे संगठन सिंधुदेश की मांग कर रहे हैं। एमक्यूएम के अल्ताफ हुसैन ने इसे ‘सिंध कार्ड’ का प्रभाव बताया है। ग्रामीण सिंध में किसानों का संकट गहरा रहा है, जो पानी और भूमि विवादों से त्रस्त हैं।
बलूचिस्तान में तो विद्रोह पहले से ही सुलग रहा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने सीपीईसी प्रोजेक्ट्स पर हमले तेज कर दिए हैं। मुनीर ने मार्च 2025 में ट्रेन हाईजैकिंग के बाद अलगाववादियों को कुचलने की कसम खाई थी, लेकिन बलूच नेता मीर यार बलोच जैसे लोग भारत से अपील कर रहे हैं कि बलूचिस्तान को स्वतंत्र मान्यता दें। रेको डीक खदान से दुर्लभ धातुओं के दोहन का प्लान भी बलूचों को भड़का रहा है, जो इसे आर्थिक शोषण मानते हैं। एक्स पर यूजर्स #BalochistanIsNotPakistan चला रहे हैं, और तालिबान सरकार को भी पाकिस्तानी सैनिकों के शवों की तस्वीरें भेजकर चेतावनी दे रहे हैं।
विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह प्लान गृहयुद्ध को न रोककर बढ़ावा देगा। आर्गेनाइजर की रिपोर्ट में कहा गया कि बलूचिस्तान, सिंध और गिलगित-बाल्टिस्तान में आंदोलन 1971 की याद दिला रहे हैं। मुनीर का ‘पाकिस्तान फर्स्ट’ नीति पड़ोसियों (भारत-अफगानिस्तान) पर फोकस करती है, लेकिन आंतरिक विद्रोह को नजरअंदाज कर रही है। एक्स पर एक यूजर ने लिखा, “पाकिस्तान जल्द पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और पश्तूनिस्तान में बंट सकता है।”
क्या मुनीर का यह दांव कामयाब होगा? या सिंध-बलूचिस्तान के लोग इसे आजादी का संकेत मानकर बगावत करेंगे? पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही टूट चुकी है—ऋण चुकाने के लिए बलूच खदानों पर निर्भरता बढ़ रही है। अगर बवाल भड़का, तो 2025 का अंत पाकिस्तान के लिए नया बांग्लादेश साबित हो सकता है। दुनिया देख रही है कि क्या इस्लामी एकता का दावा अब टुकड़ों में बंटेगा?
