कर्नाटक में हेट स्पीच रोकथाम बिल को मंजूरी: ₹5,000 जुर्माना या 3 साल जेल, जानें पूरी डिटेल
कर्नाटक में हेट स्पीच रोकथाम बिल को मंजूरी: ₹5,000 जुर्माना या 3 साल जेल, जानें पूरी डिटेल
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने हेट स्पीच और हेट क्राइम रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है। विधानसभा में पेश ‘कर्नाटक हेट स्पीच एंड हेट क्राइम्स (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) बिल, 2025’ को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। यह बिल 10 दिसंबर को विधानसभा में टेबल किया गया, जो राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली अभिव्यक्तियों पर लगाम लगाएगा। दोषी पाए जाने पर पहली बार ₹5,000 तक का जुर्माना या 3 साल तक की जेल, या दोनों हो सकती है। दोबारा अपराध पर सजा और सख्त (2-10 साल जेल और ₹1 लाख जुर्माना) होगी।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने 4 दिसंबर को कैबिनेट बैठक में इस बिल को हरी झंडी दी। विधानसभा में पेशी के दौरान बीजेपी ने जोरदार विरोध किया, जिससे सदन 10 मिनट के लिए स्थगित हो गया। स्पीकर यूटी खादर ने बहस टालकर आगे की कार्यवाही संभाली। बिल के मुताबिक, हेट स्पीच वह अभिव्यक्ति है जो धर्म, जाति, लिंग, नस्ल, भाषा, विकलांगता या जनजाति के आधार पर किसी व्यक्ति, समुदाय या संगठन के खिलाफ दुश्मनी, घृणा या वैमनस्य फैलाए। यह मौखिक, लिखित, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या किसी अन्य माध्यम से सार्वजनिक रूप से की जा सकती है।
हेट क्राइम को बिल में हेट स्पीच को बढ़ावा, प्रचार, उकसाव या सहायता के रूप में परिभाषित किया गया है। पहली सजा में न्यूनतम 1 साल जेल (7 साल तक बढ़ सकती है) और ₹50,000 जुर्माना। लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में सामान्य अपराध के लिए ₹5,000 जुर्माना और 3 साल जेल का प्रावधान बताया गया, जो राज्य के मौजूदा कानूनों (जैसे IPC की धारा 153A, 295A) को मजबूत करेगा। दोहराव पर सजा 2-10 साल जेल और ₹1 लाख जुर्माना होगी। सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, जिनकी सुनवाई फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट में होगी।
बिल में निवारक उपाय भी हैं: एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या सीनियर पुलिस अधिकारी संभावित अपराधियों पर कार्रवाई कर सकेंगे। राज्य के नामित अधिकारी इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म्स (सोशल मीडिया) से हेट कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने का आदेश दे सकेंगे। संगठनों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा – प्रबंधक साबित करेंगे कि उन्होंने रोकथाम के लिए उचित कदम उठाए, वरना सजा। यह बिल भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और IT एक्ट 2000 के पूरक के रूप में काम करेगा।
कांग्रेस का कहना है कि यह बिल राज्य में बढ़ती सांप्रदायिक तनाव को रोकने का जरूरी कदम है, खासकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही घृणा फैलाने वाली सामग्री को देखते हुए। बीजेपी ने इसे ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला’ बताकर विरोध किया। विधानसभा में बहस के बाद बिल पास होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून फेक न्यूज और कम्युनल हिंसा को काबू में रखेगा, लेकिन लागू करने में चुनौतियां रहेंगी। क्या यह बिल मॉडल बनेगा? आने वाले दिनों में साफ होगा।
