शराब न पीने वालों के लिवर भी हो रहे है खराब? डॉक्टर ने बताई वजह
शराब न पीने वालों के लिवर भी हो रहे है खराब? डॉक्टर ने बताई वजह
मुंबई: आजकल शराब न पीने वाले लोगों में भी लिवर डैमेज की शिकायतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अल्कोहल के अलावा कई अन्य कारक लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉ. सियामक ताबिब, लॉस एंजिल्स के प्रमुख गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, बताते हैं कि ‘लिवर एक मजबूत अंग है, लेकिन ज्यादा टॉक्सिन्स या फैट जमा होने से सिरोसिस (लिवर का कैंसर जैसा स्कारिंग) हो सकता है, भले ही व्यक्ति शराब न छुए।’ क्लेवलैंड क्लिनिक के अनुसार, महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है, क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्म धीमा होता है।
सबसे आम वजह है नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), जो दुनिया भर में वयस्कों के 25% तक प्रभावित कर रही है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हृदय रोग का भी बड़ा खतरा है। डॉ. मरीना रॉयटमैन, यूसीएसएफ फ्रेस्नो की लिवर प्रोग्राम डायरेक्टर, कहती हैं, ‘ओवरवेट या मोटापा फैट को लिवर में जमा कर देता है, जो इन्फ्लेमेशन और डैमेज का कारण बनता है।’ जो लोग डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे हैं, उन्हें NASH (नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहепेटाइटिस) हो सकता है, जो सिरोसिस तक ले जाता है।
दूसरी बड़ी वजह दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल है। ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक जैसे एसिटामिनोफेन (पैरासिटामॉल) लिवर पर टॉक्सिक असर डालते हैं। क्लेवलैंड क्लिनिक के डॉक्टरों का कहना है, ‘महिलाएं दवाओं से ज्यादा प्रभावित होती हैं, क्योंकि उनका बॉडी फैट ज्यादा होता है और ड्रग्स धीरे मेटाबोलाइज होते हैं।’ एंटीबायोटिक्स या हर्बल सप्लीमेंट्स भी जोखिम बढ़ाते हैं।
वायरल इंफेक्शन जैसे हेपेटाइटिस B या C लिवर को चुपचाप नुकसान पहुंचाते हैं। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार, इनका जल्दी पता न चलने से क्रॉनिक डैमेज होता है। जेनेटिक कंडीशंस जैसे हीमोक्रोमेटोसिस (आयरन ज्यादा जमा होना) या ऑटोइम्यून बीमारियां भी जिम्मेदार हैं। मेडलाइनप्लस रिपोर्ट बताती है कि ये साइलेंट डिजीज हैं – शुरुआत में कोई लक्षण नहीं, सिर्फ थकान या पेट दर्द।
डॉक्टर सलाह देते हैं: वजन कम करें (5-10% बॉडी वेट लॉस से NAFLD रिवर्स हो सकता है), रोज 20-30 मिनट एक्सरसाइज करें, शुगर और प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें। फिब्रोस्कैन जैसे नॉन-इनवेसिव टेस्ट से जल्दी डिटेक्ट करें। अगर लिवर टेस्ट अनियमित हैं, तो डॉक्टर से जांच करवाएं। याद रखें, लिवर हीलिंग कैपेसिटी रखता है – शुरुआती स्टेज में बदलाव से इसे बचाया जा सकता है।
