नीतीश कुमार के बेटे निशांत की JDU में एंट्री: पार्टी की मांग बनी धर्मसंकट
नीतीश कुमार के बेटे निशांत की JDU में एंट्री: पार्टी की मांग बनी धर्मसंकट
पटना: बिहार की सियासत में एक नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) या JDU में औपचारिक एंट्री को लेकर पार्टी के भीतर दबाव तेज हो गया है। हाल ही में JDU के वरिष्ठ नेताओं के बयानों और पटना स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों ने इस मुद्दे को गरमा दिया है। लेकिन नीतीश कुमार के लिए यह फैसला आसान नहीं है, क्योंकि वे हमेशा से वंशवाद के कट्टर विरोधी रहे हैं। अब पार्टी की ‘करो या मरो’ वाली मांग उनके सामने धर्मसंकट पैदा कर रही है।
JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने 5 दिसंबर को एयरपोर्ट पर मीडिया से खुलकर कहा कि ‘पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक सभी चाहते हैं कि निशांत जी पार्टी में आकर काम करें। यह उनका निर्णय है कि कब और कैसे।’ झा के इस बयान के साथ ही निशांत भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी कड़ी में, 9 दिसंबर को JDU मंत्री श्रवण कुमार ने भी जोर देकर कहा, ‘बिहार की जनता, नौजवान और आने वाली पीढ़ियां निशांत को राजनीति में देखना चाहती हैं। अब देरी करना ठीक नहीं।’ इन बयानों ने साफ संकेत दिया कि पार्टी नीतीश के बाद निशांत को ही अपना भविष्य मान रही है।
पार्टी मुख्यालय के बाहर लगे पोस्टरों पर लिखा है – ‘अब पार्टी की कमान संभालें निशांत’ और ‘नीतीश सेवक मांगें निशांत’। ये पोस्टर कार्यकर्ताओं की बेचैनी को दर्शाते हैं। JDU ने 6 दिसंबर से सदस्यता अभियान शुरू किया है, जिसमें एक करोड़ नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य है। सूत्र बताते हैं कि निशांत को इसी अभियान से जोड़ने की योजना है। लेकिन विपक्षी आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव के लिए यह खबर चिंता का सबब बन सकती है, क्योंकि निशांत की एंट्री से नीतीश की विरासत मजबूत हो जाएगी।
हालांकि, नीतीश कुमार के लिए यह फैसला आसान नहीं। 74 वर्षीय सीएम ने हमेशा वंशवाद को कोसा है और कहा है कि राजनीति योग्यता पर चले। 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले भी निशांत की एंट्री की चर्चा हुई थी, लेकिन नीतीश ने साफ मना कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, नीतीश की उम्र और सेहत को देखते हुए JDU में मजबूत चेहरे की कमी साफ दिख रही है। वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, ‘निशांत की चर्चा सिर्फ इसलिए क्योंकि वे नीतीश के बेटे हैं। लेकिन पार्टी के लिए यह जरूरी हो गया है।’ एक सूत्र ने बताया कि निशांत खुद तैयार हैं, लेकिन पिता की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ यूजर्स निशांत का स्वागत कर रहे हैं, तो कुछ वंशवाद पर सवाल उठा रहे हैं। JDU सांसद लवली आनंद ने कहा, ‘पॉलीटिशियन का बेटा पॉलिटिक्स नहीं करेगा तो क्या खेतीबाड़ी करेगा?’ वहीं, पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने ट्वीट किया, ‘डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बने तो ठीक, लेकिन नेता का बेटा नेता बने तो सवाल उठते हैं।’
नीतीश कुमार अब इस दबाव में क्या फैसला लेंगे? अगर निशांत एंट्री करते हैं, तो JDU को नई ऊर्जा मिल सकती है, वरना पार्टी में असंतोष बढ़ सकता है। बिहार की सियासत में यह ‘करो या मरो’ का दौर चल रहा है। फिलहाल, निशांत की चुप्पी ही सबसे बड़ा संकेत है।
