देहरादून: मुख्यमंत्री गेम चेंजर योजना के तहत ‘भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण-2025’ शुरू, CM धामी ने दिखाई हरी झंडी
देहरादून: मुख्यमंत्री गेम चेंजर योजना के तहत ‘भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण-2025’ शुरू, CM धामी ने दिखाई हरी झंडी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय परिसर से “मुख्यमंत्री गेम चेंजर योजना” के अंतर्गत ‘भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण-2025’ की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस बार उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2025 में मेरिट लिस्ट में स्थान बनाने वाले 200 से अधिक मेधावी विद्यार्थी देश के विभिन्न राज्यों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक स्थलों का भ्रमण करेंगे।
बच्चों के बीच पहुंचे CM धामी, बोले — “ये यात्रा सिर्फ घूमना नहीं, भारत को समझना है”
कार्यक्रम में बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच पहुंचे CM धामी ने कहा:
“ये बच्चे उत्तराखंड का गौरव हैं। किताबों के अलावा जब वे ताजमहल, लाल किला, वैज्ञानिक संस्थानों, IIT-IIM और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों को अपनी आंखों से देखेंगे, तो उनकी सोच का दायरा अपने आप चौड़ा हो जाएगा। भारत की एकता में विविधता को ये बच्चे न सिर्फ समझेंगे, बल्कि आगे चलकर उत्तराखंड और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।”
यात्रा का रूट और खास बातें
कुल 15 दिन की यह यात्रा 4 अलग-अलग रूट पर चलेगी।
प्रमुख स्थल: दिल्ली, आगरा, जयपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु, मैसूर, अहमदाबाद, सांची स्तूप, खजुराहो मंदिर, वाराणसी, बोधगया, कोलकाता आदि।
हर बैच में 45-50 विद्यार्थी + शिक्षक + गाइड।
पूरी यात्रा (रेल/वोल्वो बस/हवाई जहाज) और ठहरने-खाने का खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है।
विद्यार्थियों को डिजिटल कैमरा/टैब भी दिए जा रहे हैं ताकि वे अपने अनुभव को डॉक्यूमेंट कर सकें।
अब तक के आंकड़े (2023-2025)
2023: 850 विद्यार्थी
2024: 1,200 विद्यार्थी
2025: 2,000+ विद्यार्थियों का लक्ष्य
अभिभावकों और बच्चों की प्रतिक्रिया
रुद्रपुर की टॉपर प्रिया ने कहा, “पहली बार उत्तराखंड से बाहर जा रही हूं, IIT दिल्ली और ISRO देखने का सपना पूरा होगा।”
एक अभिभावक ने बताया, “सरकार ने बच्चों को वो मौका दिया जो हम मध्यमवर्गीय परिवार कभी सोच भी नहीं सकते थे।”
मुख्यमंत्री धामी ने अंत में कहा:
“हमारा सपना है कि उत्तराखंड का हर मेधावी बच्चा दुनिया देखे, दुनिया को समझे और दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन करे। ये गेम चेंजर योजना इसी दिशा में एक और कदम है।”
इस अनूठी पहल को पूरे देश में सराहा जा रहा है। कई अन्य राज्य भी अब उत्तराखंड मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
