इंडिगो संकट के बीच दिल्ली एयरपोर्ट पर बैग्स का अंबार: यात्रियों की बर्बादी, सरकार ने लगाई 48 घंटे की डेडलाइन
इंडिगो संकट के बीच दिल्ली एयरपोर्ट पर बैग्स का अंबार: यात्रियों की बर्बादी, सरकार ने लगाई 48 घंटे की डेडलाइन
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का संकट अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन फ्लाइट कैंसिलेशन का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार को दिल्ली और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 250 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसल हो गईं, जिससे हजारों यात्री फिर सड़क पर। लेकिन सबसे ज्यादा त्रासदी का नजारा दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दिखा, जहां अनक्लेम्ड बैग्स का पहाड़ खड़ा हो गया। वायरल वीडियो और फोटोज में टर्मिनल-1 के अंदर सैकड़ों सूटकेस, बैग्स और ट्रॉलीज की लंबी-लंबी कतारें नजर आ रही हैं, जो यात्रियों से बिछड़ चुकी हैं। कई यात्री 24-48 घंटे बाद भी अपने सामान का इंतजार कर रहे हैं, जिससे गुस्सा फूट पड़ा है।
यह संकट 3 दिसंबर से शुरू हुआ, जब पायलट शॉर्टेज, रोस्टरिंग गड़बड़ी और विंटर शेड्यूल के दबाव ने एयरलाइन की कमर तोड़ दी। इंडिगो ने रविवार को दावा किया कि 95% नेटवर्क बहाल हो गया है और 137 में से 138 डेस्टिनेशन्स पर फ्लाइट्स चालू हैं, लेकिन बैगेज हैंडलिंग अभी भी सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। एयरपोर्ट पर स्टाफ यात्रियों को बैग्स की पहचान कराने में जुटा है, लेकिन भीड़ इतनी है कि प्रक्रिया घंटों ले रही है। एक यात्री ने बताया, “मेरा बैग चार दिन से गायब है। शादी के कपड़े खरीदे थे, अब सब बर्बाद। इंडिगो ने सिर्फ पानी का बोतल दिया।” मुंबई और बेंगलुरु एयरपोर्ट्स पर भी यही हाल है – अनक्लेम्ड बैग्स की ढेर लगी हैं, और सोशल मीडिया पर #IndiGoBaggageCrisis ट्रेंड कर रहा है।
सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने सख्त कदम उठाए हैं। शनिवार को निर्देश जारी कर कहा कि सभी कैंसल फ्लाइट्स के रिफंड 7 दिसंबर रात 8 बजे तक पूरे होने चाहिए, और यात्रियों से बिछड़े बैग्स 48 घंटे में डिलीवर हों। रविवार तक इंडिगो ने 3,000 बैग्स डिलीवर किए, लेकिन अभी भी हजारों लंबित हैं। मिनिस्ट्री ने फेयर कैप लगाई, ताकि अन्य एयरलाइन के टिकट महंगे न हों। डीजीसीए ने पायलट ड्यूटी नियमों में ढील दी, लेकिन हाई-लेवल प्रॉब में चार सदस्यीय पैनल गठित कर जांच शुरू कर दी। इंडिगो सीईओ पीयूष अग्रवाल ने माफी मांगी: “यह हमारा सबसे बुरा दिन था। हम 1,500 फ्लाइट्स चला रहे हैं, लेकिन बैगेज ट्रेसिंग पर फोकस है।”
यात्रियों का गुस्सा हद पार कर चुका। दिल्ली एयरपोर्ट पर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां लोग नारेबाजी कर रहे थे। एक यात्री ने कहा, “12-24 घंटे इंतजार, कोई कम्युनिकेशन नहीं। हम जानवरों की तरह फंसे हैं।” दिल्ली हाईकोर्ट में पीआईएल दायर हुई, जिसमें सरकार से तत्काल राहत की मांग की गई। कोर्ट ने 10 दिसंबर को सुनवाई तय की। विपक्ष ने सरकार पर ‘मोनोपॉली मॉडल’ का आरोप लगाया, जबकि राहुल गांधी ने ट्वीट किया: “इंडिगो का संकट आम आदमी की मार है।” एक्सपर्ट्स का कहना है कि नॉर्मल सिचुएशन लौटने में 3 दिन लग सकते हैं, लेकिन बैगेज इश्यू हफ्तों खिंच सकता है।
इंडिगो ने वैकल्पिक बुकिंग पर फुल रिफंड का ऐलान किया, लेकिन यात्रियों को सलाह है कि ऐप या हेल्पलाइन पर ट्रैक करें। ixigo जैसी ट्रैवल ऐप्स ने कन्वीनियंस फीस रिफंड करने का वादा किया। यह संकट न केवल इंडिगो की साख को झटका दे रहा, बल्कि एविएशन सेक्टर की कमजोरियों को उजागर कर रहा है। क्या सरकार का हाई-लेवल प्रॉब कुछ बदलाव लाएगा? इंतजार ही इंतजार।
