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स्मार्ट टीवी और स्मार्टफोन हो सकते हैं महंगे: रुपये की कमजोरी और चिप्स की बढ़ती लागत से EMI पर बोझ

स्मार्ट टीवी और स्मार्टफोन हो सकते हैं महंगे: रुपये की कमजोरी और चिप्स की बढ़ती लागत से EMI पर बोझ

नए साल की शॉपिंग की प्लानिंग कर रहे हैं? तो स्मार्ट टीवी या स्मार्टफोन खरीदने से पहले जेब ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, स्मार्ट टीवी और स्मार्टफोन की कीमतों में 5-10% तक का इजाफा हो सकता है। सितंबर 2025 में जीएसटी कट (28% से 18%) से मिली राहत अब खतरे में नजर आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की गिरती वैल्यू और मेमोरी चिप्स की बढ़ती डिमांड मुख्य वजहें हैं, जो आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भर इन गैजेट्स को महंगा बना रही हैं।

रुपये की गिरावट ने सबसे ज्यादा असर डाला है। डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के पार पहुंच गया है, जिससे इंपोर्टेड पार्ट्स – जैसे ओपन सेल्स, डिस्प्ले पैनल्स और प्रोसेसर्स – महंगे हो गए हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2024 में स्मार्ट टीवी मार्केट 3% सिकुड़ चुका था, और 2025 में शिपमेंट ग्रोथ सिंगल डिजिट में रहने का अनुमान है। एसपीपीएल (सुपर प्लॉनेट प्रोडक्ट्स लिमिटेड) के सीईओ अवनीत सिंह मरवाह ने कहा, “रुपये की कमजोरी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ने से जीएसटी कट का फायदा मिट सकता है।” टीवी ब्रांड्स जैसे एलजी, सोनी, टीसीएल, सैमसंग और शाओमी – जो कुल शिपमेंट्स का आधा हिस्सा हैं – 7% तक प्राइस हाइक पर विचार कर रहे हैं।

दूसरी बड़ी वजह है मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमत। एआई डेटा सेंटर्स की डिमांड से चिप्स की कमी हो गई है, जो स्मार्ट टीवी के एआई चिप्स और स्मार्टफोन्स के रैम/स्टोरेज में इस्तेमाल होती हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधा और बढ़ते इनपुट कॉस्ट्स ने मैन्युफैक्चरर्स को परेशान कर दिया है। स्मार्टफोन्स के मामले में, 5जी टेक्नोलॉजी और जेनरेटिव एआई फीचर्स की डिमांड से एवरेज सेलिंग प्राइस (एएसपी) 2025 में 5% बढ़ सकता है। काउंटरपॉइंट के मुताबिक, प्रीमियम डिवाइसेस की ओर शिफ्ट से कॉस्ट और ऊपर चढ़ेगी।

हालांकि, बजट 2025 में कस्टम्स ड्यूटी कट से कुछ राहत मिली थी, लेकिन ग्लोबल ट्रेंड्स ने इसे ओवरराइड कर दिया। छोटे ब्रांड्स मार्जिन प्रेशर से मार्केट से बाहर हो रहे हैं, जबकि प्रीमियम टीवीज (क्यूएलईडी, ओएलईडी) की डिमांड बढ़ रही है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ से 4के यूएचडी टीवीज पॉपुलर हो रहे हैं, लेकिन बड़े स्क्रीन साइज (43-55 इंच) की कीमतें 20,000-40,000 रुपये के सेगमेंट में 10% महंगी हो सकती हैं।

उपभोक्ताओं को सलाह है कि फेस्टिवल सेल्स का इंतजार करें या लोकल मैन्युफैक्चरिंग वाले ब्रांड्स चुनें। अगर प्राइस हाइक हुआ तो 50,000 रुपये का स्मार्ट टीवी 3,000-5,000 महंगा हो सकता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स चेताते हैं कि बिना वैल्यू एडिशन बढ़ाए, यह ट्रेंड कंज्यूमर स्पेंडिंग को प्रभावित करेगा। क्या सरकार इंपोर्ट ड्यूटी पर फिर विचार करेगी? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल टेक बजट पर ब्रेक लग सकता है।

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