उत्तराखंड

उत्तराखंड में बाघ का कहर: विधायक दिलीप रावत ने दी इस्तीफे की धमकी

उत्तराखंड में बाघ का कहर: विधायक दिलीप रावत ने दी इस्तीफे की धमकी

पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। पौड़ी जिले के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के जयहरीखाल ब्लॉक में सिरोबाड़ी गांव में शुक्रवार देर शाम एक बाघ ने 60 वर्षीय महिला उर्मिला देवी को अपना निवाला बना लिया। यह घटना क्षेत्र में दहशत फैला रही है, जहां वन्यजीवों के हमले रोजमर्रा की जिंदगी को दांव पर लगा रहे हैं। वन विभाग की लापरवाही पर सवाल उठते हुए बीजेपी विधायक दिलीप सिंह रावत ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया और इस्तीफे की धमकी दी।

घटना शुक्रवार शाम करीब 5 बजे घटी। उर्मिला देवी अपनी बहू प्रिया के साथ घर के पास ही मवेशियों के लिए चारापत्ती काट रही थीं। इसी बीच घर से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर प्रिया लौट गई, जबकि उर्मिला वहीं खेत में रुकीं। झाड़ियों से अचानक बाघ फुर्ती से निकला और उर्मिला पर झपट्टा मार दिया। बाघ ने उन्हें करीब 50 मीटर घसीटते हुए जंगल की ओर ले जाकर मार डाला। जब उर्मिला देर तक न लौटीं, तो प्रिया ने तलाश शुरू की। खेत के पास खून के धब्बे देखकर वह चीखीं, तो ग्रामीण दौड़े। दूरी पर शव पड़ा था और सामने बाघ बैठा हुआ। ग्रामीणों की चीखें सुन बाघ भागा। कालागढ़ टाइगर रिजर्व की टीम ने शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।

घटना की सूचना मिलते ही विधायक दिलीप सिंह रावत गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार से मिले और सांत्वना दी। रावत का गुस्सा फूट पड़ा – उन्होंने कहा, “क्षेत्र में बाघ के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। वन विभाग और सरकार की लापरवाही से लोग जान जोखिम में डालकर जी रहे हैं। मैंने विधानसभा में कई बार मुद्दा उठाया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं। अगर ग्रामीणों की सुरक्षा न सुनिश्चित हुई, तो इस्तीफा दूंगा।” उन्होंने 11 साल से लंबित सड़क निर्माण का जिक्र किया – पुल तो बन गया, लेकिन जोड़ने वाली सड़क अधर में लटकी है। ग्रामीण जंगल के रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं, जो हमलों को न्योता दे रहा है।

रावत ने तत्काल बाघ को मारने की अनुमति और सुरक्षा उपायों की मांग की। कहा, “कालागढ़ वन प्रभाग से सटी विधानसभा में महिलाएं-बच्चे डर के साए में जी रहे। वन अधिनियम में शिथिलता लाकर स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नियम बनें।” ग्रामीणों ने भी आक्रोश जताया – “वन विभाग घटना के बाद आता है, लेकिन रोकथाम के लिए कुछ नहीं। सड़क बनेगी तभी जंगल से बचेंगे।”

यह घटना 2025 की 12वीं बाघ हमले से मौत है। पौड़ी सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां तेंदुए और भालुओं के हमले भी आम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कॉर्बेट रिजर्व के पास बस्तियां बढ़ने और शिकार की कमी से बाघ गांवों में घुस रहे। वन विभाग ने पेट्रोलिंग बढ़ाई है, लेकिन स्थानीय कहते हैं – “बिना सड़क और बाड़ के समाधान अधूरा।”

रामनगर में गुलदार का हमला: युवक गंभीर घायल, अस्पताल में इलाज

इसी बीच रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग के पतरामपुर रेंज में देर शाम एक गुलदार ने युवक पर हमला कर दिया। युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। वन टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उसे जसपुर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया। यह 2025 की 12वीं तेंदुआ हमले से मौत वाली घटना का हिस्सा है, जहां 88 लोग घायल हुए। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने का अभियान शुरू किया।

उत्तराखंड में 2000 से 900 से ज्यादा मौतें वन्यजीवों से हुईं। सरकार ने मुआवजा बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण सुरक्षा की मांग पर अड़े हैं। फिलहाल, इलाके में हाई अलर्ट है।

 

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