बंगाल में बाबरी मस्जिद जैसी नई मस्जिद का शिलान्यास: हुमायूं कबीर ने रखा पत्थर, ईंटें लादकर पहुंचे समर्थक, तनाव बढ़ा
बंगाल में बाबरी मस्जिद जैसी नई मस्जिद का शिलान्यास: हुमायूं कबीर ने रखा पत्थर, ईंटें लादकर पहुंचे समर्थक, तनाव बढ़ा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में 6 दिसंबर 2025 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर एक नया विवाद खड़ा हो गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसी डिजाइन वाली नई मस्जिद का शिलान्यास कर दिया। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में हजारों समर्थक जुटे, जिनमें से कई सिर पर ईंटें लादकर पहुंचे। यह प्रतीकात्मक कदम 1992 की घटना के ‘दर्द को याद करने’ का दावा करते हुए उठाया गया, लेकिन इससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव की आशंका बढ़ गई है।
हुमायूं कबीर, जो भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, ने 2024 में ही इस मस्जिद निर्माण का ऐलान किया था। उन्होंने कहा, “यह 1992 के घावों को भरने का प्रयास है। मालदा, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना के लोग आर्थिक व सामाजिक योगदान देंगे।” कार्यक्रम में कुरान पाठ के बाद कबीर ने नींव का पत्थर रखा। समर्थक, मुख्यतः मुस्लिम समुदाय से, बंगाल के विभिन्न हिस्सों से ईंटें लेकर आए। एक समर्थक मोहम्मद सफीकुल इस्लाम ने कहा, “हमारी मस्जिद बनेगी, यह हमारा योगदान है।” लगभग 60,000 लोगों के लिए बिरयानी की व्यवस्था भी की गई, जिसमें सऊदी अरब के मौलाना भी शामिल हुए।
TMC ने कबीर को नवंबर में निलंबित कर दिया था, जब उन्होंने हिंदुओं को ‘धमकी’ देते हुए कहा था कि मुर्शिदाबाद में मुस्लिम 70% हैं। पार्टी ने इसे ‘भड़काऊ’ बताया और कहा कि यह TMC का कार्यक्रम नहीं है। TMC नेता ने आरोप लगाया कि कबीर BJP के ‘एजेंट’ की तरह काम कर रहे हैं। BJP ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, “ममता तुष्टिकरण कर रही हैं। अगर BJP सत्ता में आई तो एक भी ईंट नहीं रखने देंगे।” उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने भी इसे ‘उकसावे’ का बताया।
प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित कर 3,000 पुलिसकर्मी तैनात किए। कोलकाता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को निर्माण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य पर डाली। कबीर ने दावा किया कि उन्हें पुलिस व प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कबीर को ‘जाहिल’ कहा, जबकि AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने 1992 की घटना याद दिलाते हुए सुप्रीम कोर्ट के वादे पर सवाल उठाया। JDU ने इसे ‘धार्मिक तनाव बढ़ाने वाला’ बताया।
यह घटना बंगाल की सियासत को गरमा रही है, जहां हाल के वर्षों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ा है। जानकारों का कहना है कि यह राम मंदिर निर्माण के बाद मुस्लिम समुदाय के बीच असंतोष का प्रतीक हो सकता है। फिलहाल, इलाके में शांति बनी हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर उत्तेजक पोस्ट्स से सतर्कता बरती जा रही है। ममता सरकार ने अपील की है कि शांति बनाए रखें।
