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‘दरगाह किसी के बाप की नहीं…’: लाइसेंस विवाद पर भड़के सरवर चिश्ती, खादिमों ने दी चेतावनी—’10 हजार लोग भर देंगे’

‘दरगाह किसी के बाप की नहीं…’: लाइसेंस विवाद पर भड़के सरवर चिश्ती, खादिमों ने दी चेतावनी—’10 हजार लोग भर देंगे’

अजमेर शरीफ दरगाह में जियारत के लिए खादिमों को लाइसेंस लेने के प्रस्ताव पर बड़ा विवाद छिड़ गया है। अंजुमन कमेटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने सख्त लहजे में कहा, “दरगाह किसी के बाप की नहीं है, यह इस्लामिक संस्था है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लाइसेंस सिस्टम लागू करने पर जोर दिया गया, तो खादिम समुदाय के 10 हजार से ज्यादा लोग दरगाह को भर देंगे। चिश्ती ने कहा, “हमारे लाखों अनुयायी हैं, हमें हल्के में न लें।” यह बयान दरगाह कमेटी के लाइसेंस प्रस्ताव के खिलाफ खादिमों की नाराजगी को दर्शाता है।

विवाद की जड़ दरगाह कमेटी का हालिया फैसला है, जिसमें जियारत (दर्शन) के लिए खादिमों को लाइसेंस लेना अनिवार्य करने की बात कही गई। कमेटी का तर्क है कि इससे अव्यवस्था रुकेगी और पर्यटकों को सुगमता मिलेगी। लेकिन खादिमों का कहना है कि यह उनकी सदियों पुरानी परंपरा पर हमला है। सरवर चिश्ती ने कहा, “खादिमों का जियारत का अधिकार शरिया और परंपरा से है। लाइसेंस से हमारी आजीविका और सम्मान पर चोट पहुंचेगी।” अंजुमन सैयदजादगान ने कमेटी के फैसले को “दरगाह के स्वायत्तता का उल्लंघन” बताते हुए विरोध जताया।

यह विवाद दरगाह के प्रबंधन को लेकर पुरानी खींचतान को फिर उजागर कर रहा है। दरगाह ख्वाजा साहब एक्ट 1955 के तहत कमेटी का गठन हुआ, लेकिन खादिमों का दावा है कि वे पीढ़ियों से सेवा कर रहे हैं। हाल ही में शिव मंदिर विवाद के बाद यह नया पंगा सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल खड़े कर रहा। चिश्ती ने कहा, “दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है, इसे राजनीतिकरण न करें।” खादिमों ने कमेटी से बातचीत की मांग की, वरना आंदोलन की चेतावनी दी।

राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया आ रही। भाजपा ने कमेटी के फैसले का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस ने खादिमों के पक्ष में बोला। विशेषज्ञों का कहना है कि लाइसेंस सिस्टम लागू होने से रोजाना लाखों आने वाले श्रद्धालुओं पर असर पड़ेगा। अजमेर दरगाह न केवल धार्मिक, बल्कि पर्यटन का केंद्र है, जहां सालाना करोड़ों रुपये की आय होती है। चिश्ती फाउंडेशन ने शांति अपील की, लेकिन तनाव बरकरार है। फिलहाल, कमेटी ने स्पष्टीकरण देने का वादा किया, लेकिन खादिमों का आक्रोश शांत होने का नाम नहीं ले रहा।

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