जहरीले कफ सिरप पर सदन में हंगामा: डमी बेबी हाथों में, कांग्रेस ने सरकार को ठहराया ‘पूतना’
जहरीले कफ सिरप पर सदन में हंगामा: डमी बेबी हाथों में, कांग्रेस ने सरकार को ठहराया ‘पूतना’
मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही कफ सिरप कांड ने सदन को तहस-नहस कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने छिंदवाड़ा-बैतूल में जहरीले कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौतों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में डमी बेबी (बच्चों के पुतले) थामे, कफ सिरप की बोतलों को ‘राक्षस’ बताते हुए विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे और सीबीआई जांच की मांग के बीच सदन में नारेबाजी और हंगामा चरम पर पहुंच गया।
कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान आसंदी के सामने धरना दिया। उन्होंने कफ सिरप की बोतलों को हवा में लहराते हुए चिल्लाया, “यह सिरप नहीं, मौत का जहर है! सरकार पूतना बनी हुई है, जो बच्चों का खून पी रही है।” छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से अब तक 17 बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि बैतूल में दो और मामले सामने आए। फॉरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि सिरप में घातक रसायन थे, जो किडनी फेलियर का कारण बने। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह दवा अन्य राज्यों में बैन थी, फिर भी एमपी के बाजारों में बिक रही थी। ड्रग कंट्रोलर को हटाने से काम नहीं चलेगा, दोषियों पर एफआईआर और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा, “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, अपराध है। सरकार ने बच्चों की जिंदगी दांव पर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की याचिका दायर हो चुकी है, लेकिन सदन में चर्चा से भाग रही भाजपा।” प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने भी भोपाल में पीसीसी कार्यालय के बाहर कैंडल मार्च निकाला, जहां 12 खोपड़ियों के प्रतीक चिन्हों से बच्चों की मौत का प्रतीक चित्रण किया गया। जावरा, रतलाम जैसे जिलों में ब्लॉक कांग्रेस ने अलग-अलग कैंडल मार्च आयोजित कर श्रद्धांजलि दी।
सीएम मोहन यादव ने सदन से बाहर बयान दिया, “बच्चों की मौत पर कोई समझौता नहीं। तमिलनाडु की दवा कंपनी पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन विपक्ष राजनीति कर रहा है।” उन्होंने ड्रग कंट्रोलर को हटाने और सिरप पर बैन का जिक्र किया, मगर कांग्रेस ने इसे नाकाफी बताया। सत्र की कम अवधि पर भी सवाल उठे — सिर्फ 10 दिन का सत्र, जनहित मुद्दों पर चर्चा कैसे?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कांड दवा नियंत्रण व्यवस्था की पोल खोलता है। कांग्रेस ने सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी दी है। क्या सरकार जवाब देगी, या हंगामा जारी रहेगा? मध्य प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है।
