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दिल्ली ब्लास्ट केस: हल्द्वानी बिलाल मस्जिद के मौलाना आसिम कासमी को पूछताछ के बाद रिहा किया, मोबाइल-लैपटॉप जब्त

दिल्ली ब्लास्ट केस: हल्द्वानी बिलाल मस्जिद के मौलाना आसिम कासमी को पूछताछ के बाद रिहा किया, मोबाइल-लैपटॉप जब्त

दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट मामले की जांच में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक नया मोड़ दिया है। हल्द्वानी की बिलाल मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद आसिम कासमी को शक के आधार पर हिरासत में लेने के बाद लगभग 20 घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया है। हालांकि, उनकी जांच में सहयोग के लिए उनका मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर लिया गया है। देर रात मस्जिद के बाहर निकले मौलाना ने मीडिया से कहा, “NIA ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे, मैंने पूरा सहयोग किया। सब ठीक है।”

शुक्रवार रात (29 नवंबर) को NIA और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके से मौलाना आसिम और उनके एक सहयोगी (एक इलेक्ट्रिशियन) को हिरासत में लिया था। जांच एजेंसियों को शक था कि मौलाना पर देश-विरोधी संगठनों से संपर्क का लिंक हो सकता है। यह कार्रवाई मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी के कॉल डिटेल्स से मिले सुराग पर आधारित थी, जो ब्लास्ट के मास्टरमाइंड माने जा रहे हैं। उमर नबी के एक मोबाइल नंबर से हल्द्वानी का कनेक्शन मिला, जिसके बाद NIA ने छापा मारा।

पूछताछ के दौरान मौलाना और सहयोगी को दिल्ली ले जाया गया, जहां NIA ने उनके फोन रिकॉर्ड्स और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच की। नैनीताल जिले के तल्लीताल हरीनगर वार्ड की एक मस्जिद के इमाम मौलाना नईम को भी इसी कड़ी में करीब तीन घंटे पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, तीनों संदिग्धों को नैनीताल पुलिस के हवाले कर दिया गया था, जिन्होंने भी अलग से पूछताछ की। लेकिन कोई ठोस सबूत न मिलने पर सभी को छोड़ दिया गया।

NIA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “पूछताछ में सहयोग मिला, लेकिन जरूरत पड़ने पर दोबारा बुलाया जा सकता है। जांच जारी है, और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण होगा।” हल्द्वानी में बनभूलपुरा इलाके में मस्जिद के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्थानीय एसपी मनोज कुमार कत्याल ने कहा, “संवेदनशील इलाके में शांति बनाए रखने के लिए फोर्स तैनात है।”

दिल्ली ब्लास्ट में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें जसिर बिलाल वानी (तकनीकी सहायता देने वाला), अमीर राशिद अली (कार का मालिक) और सोयब (शरण देने वाला) शामिल हैं। कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों – डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागय और डॉ. अदील अहमद राथर – की NIA कस्टडी 10 दिनों के लिए बढ़ा दी है। मुख्य आरोपी उमर नबी ने कथित तौर पर हमास-स्टाइल हमले की योजना बनाई थी, जिसमें महिलाओं को भर्ती करने की भी साजिश थी।

यह रिहाई जांच में किसी बड़े ब्रेकथ्रू की बजाय रूटीन वेरिफिकेशन का संकेत दे रही है। लेकिन उत्तराखंड-यूपी के रैंपूर लिंक से ब्लास्ट का कनेक्शन मजबूत हो रहा है। क्या आगे और गिरफ्तारियां होंगी? NIA की अगली चाल का इंतजार।

 

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