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अल-फलाह चेयरमैन जवाद की काली करतूतें बेनकाब: मृतकों की करोड़ों की जमीन फर्जी साइन से बेच डाली, ED ने गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू

अल-फलाह चेयरमैन जवाद की काली करतूतें बेनकाब: मृतकों की करोड़ों की जमीन फर्जी साइन से बेच डाली, ED ने गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू

नई दिल्ली। अल-फलाह ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी (जावेद अहमद सिद्दीकी) पर दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में मृत लोगों की करोड़ों रुपये कीमत की जमीन हड़पने का संगीन आरोप लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को इस घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसमें जवाद ने दशकों पहले मर चुके 30 से अधिक हिंदू परिवारों के नाम पर फर्जी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) बनवाकर जमीन को अपने कंट्रोल वाले तरबिया फाउंडेशन के नाम ट्रांसफर करवा दिया। यह खुलासा दिल्ली कार ब्लास्ट केस की जांच के दौरान ED की तलाशी से सामने आया, जिसके बाद जवाद को 13 दिनों की रिमांड पर लिया गया है। पीड़ित परिवारों ने धमकी और अपहरण जैसे आरोप भी लगाए हैं, जो इस साजिश को और गहरा बनाते हैं।

ED की जांच के मुताबिक, यह घोटाला 2004 का है, जब जवाद ने मृतकों के फर्जी साइन कराकर साउथ दिल्ली की प्राइम लोकेशन पर फैली 10 एकड़ से अधिक जमीन का सौदा किया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट पर ED ने मुहर लगाई कि जवाद के तरबिया फाउंडेशन ने ‘सीक्रेट पार्किंग’ के नाम पर इस जमीन पर कब्जा जमाया। पीड़ितों ने बताया कि जमीन के मालिक 1950-60 के दशक में ही चल बसे थे, लेकिन 2004 के दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर दिखाए गए। एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने कहा, “हमारी पैतृक संपत्ति को फर्जी कागजों से हड़पा गया। जब विरोध किया, तो गुंडों ने धमकी दी।” ED ने जवाद के दिल्ली के जामिया नगर स्थित घर और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फरीदाबाद कैंपस पर 19 ठिकानों पर छापे मारे, जहां से फर्जी GPA, डिजिटल सबूत और 415 करोड़ की अनुचित कमाई के रिकॉर्ड बरामद हुए।

जवाद की गिरफ्तारी 18 नवंबर को PMLA की धारा 19 के तहत हुई, जब ED ने साकेत कोर्ट में उन्हें देर रात पेश किया। एडिशनल सेशन जज शीतल चौधरी ने 13 दिनों की कस्टडी दी, जिसमें जवाद से जमीन सौदे, फर्जी मान्यता और मनी लॉन्ड्रिंग के सवाल पूछे जा रहे हैं। ED का दावा है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने 2018-2025 के बीच फर्जी NAAC और UGC 12(B) मान्यता का दावा कर 415.10 करोड़ रुपये की फीस वसूली। यूजीसी ने पुष्टि की कि यूनिवर्सिटी केवल सेक्शन 2(f) के तहत रजिस्टर्ड है, 12(B) का आवेदन कभी नहीं किया। जवाद पर दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट केस में भी शक है, जहां यूनिवर्सिटी के तीन प्रोफेसरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

यह मामला अल-फलाह ग्रुप की छवि को धूमिल कर रहा है, जो शिक्षा के नाम पर चल रहा है लेकिन फंडिंग के स्रोत संदिग्ध हैं। जवाद, जो 1995 से चैरिटेबल ट्रस्ट चला रहे हैं, पर पहले भी FIR दर्ज हैं – गलत जमीन खरीद, धमकी और अपहरण के। NIA और दिल्ली पुलिस की FIR पर ED की जांच चल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘डेड मैन साइनिंग’ घोटाला भारत के प्रॉपर्टी फ्रॉड का बड़ा उदाहरण है, जहां मृतकों के नाम पर अरबों की संपत्ति हड़पी जाती है। पीड़ितों ने न्याय की मांग की है, जबकि ED ने और गिरफ्तारियां होने का संकेत दिया है। जवाद की रिमांड 1 दिसंबर तक है, और कोर्ट ने साफ कहा कि बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के सबूत मजबूत हैं। यह केस न सिर्फ आर्थिक अपराध, बल्कि सामाजिक विश्वास पर सवाल खड़ा कर रहा है।

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