राजनीति

कर्नाटक कांग्रेस में खुली रार: शिवकुमार के ‘जुबान का पक्का’ वाले तंज पर सिद्धारमैया का जवाब, हाईकमान को फैसला सौंपा

कर्नाटक कांग्रेस में खुली रार: शिवकुमार के ‘जुबान का पक्का’ वाले तंज पर सिद्धारमैया का जवाब, हाईकमान को फैसला सौंपा

कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता साझेदारी का ‘अघोषित फॉर्मूला’ अब खुली जंग में बदल गया है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के तंज भरे सोशल मीडिया पोस्ट का मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सीधा जवाब देते हुए कहा कि ‘शब्द तभी शक्ति है जब वह लोगों के लिए दुनिया बेहतर बनाए’। यह रार 2023 के पावर शेयरिंग एग्रीमेंट को लेकर भड़की है, जहां सिद्धारमैया को 2.5 साल बाद कुर्सी छोड़नी थी। हाईकमान ने दोनों नेताओं को 29-30 नवंबर को दिल्ली बुलाया है, जहां फैसला होगा।

विवाद की शुरुआत 26 नवंबर को हुई, जब शिवकुमार ने एक्स पर कन्नड़ में पोस्ट की: “ಕೊಟ್ಟ ಮಾತು ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದೇ ವಿಶ್ವದಲ್ಲಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಶಕ್ತಿ!” (अर्थ: ‘दिए गए वचन को निभाना ही दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है!’)। यह पोस्ट स्पष्ट रूप से सिद्धारमैया पर तंज था, जो 2023 में हाईकमान के साथ हुए कथित समझौते को भूलने का आरोप लगा रहा था। शिवकुमार ने कहा, “वर्ड पावर इज वर्ल्ड पावर। जज, प्रेसिडेंट या कोई भी—सबको वॉक द टॉक करना चाहिए।” यह बयान उनके दिल्ली दौरे से पहले आया, जहां वे सोनिया गांधी से मिलने वाले हैं।

सिद्धारमैया ने 27 नवंबर को तुरंत जवाब दिया। एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने लिखा: “शक्ति योजना ने राज्य की महिलाओं को 600 करोड़ से अधिक मुफ्त यात्राएं प्रदान की हैं। सरकार बनते ही हमने गारंटी को कार्रवाई में बदल दिया। एक शब्द शक्ति नहीं है जब तक वह लोगों के लिए दुनिया को बेहतर न बनाए।” सीएम ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र कर शिवकुमार के तंज को पलट दिया, और कहा कि जनादेश 5 साल की जिम्मेदारी है, न कि क्षणिक। सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया, “सीएम पद पर बहस अनावश्यक है। कैबिनेट रीशफल हाईकमान का विशेषाधिकार है।”

यह रार कर्नाटक सरकार के आधे कार्यकाल (20 नवंबर को पूरा) के बाद तेज हुई। शिवकुमार के समर्थक विधायक दिल्ली उड़कर मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले, जहां उन्होंने कहा, “सभी 140 विधायक हमारे हैं।” सिद्धारमैया कैंप ने काउंटर मीटिंग बुलाई, जहां गृह मंत्री जी. परमेश्वरा ने कहा, “अगर हाईकमान शिवकुमार को सीएम बनाए, तो हम स्वीकार करेंगे।” लेकिन सिद्धारमैया के करीबी सतीश जरकीहोली ने कहा, “सिद्धारमैया ही नेता हैं।”

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा, “टीम फैसला लेगी। कोई एकतरफा कदम नहीं।” हाईकमान ने दोनों को चेतावनी दी कि सार्वजनिक बयान बंद करें, वरना पार्टी इमेज खराब होगी। विपक्ष ने इसे कमजोरी बताया—बीजेपी के बी. वाई. राघवेंद्र ने कहा, “कांग्रेस में आंतरिक कलह से राज्य का नुकसान हो रहा।” विशेषज्ञों का मानना है कि वोकालिगा (शिवकुमार) और लिंगायत (सिद्धारमैया) समुदायों की सियासत 2028 विधानसभा चुनाव को प्रभावित करेगी। अगर समझौता न हुआ, तो दलित नेता खड़गे को समझौता उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

क्या दिल्ली मीटिंग रार खत्म करेगी? फिलहाल, कर्नाटक कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हाईकमान का फैसला ही अंतिम होगा।

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