गंगाजल: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र?
गंगाजल: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र?
हिंदू धर्म में गंगा को सिर्फ नदी नहीं, माँ कहा जाता है। गंगाजल को अमृत तुल्य माना जाता है। इसे छूने, पीने या स्नान करने मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं। लेकिन यह विश्वास कहाँ से आया? आइए वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोण से समझते हैं।
धार्मिक कारण (पुराणों के अनुसार)
भगीरथ प्रयत्न: राजा भगीरथ ने अपने 60,000 पूर्वजों को मुक्ति दिलाने के लिए कठोर तपस्या की। भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समाया और धरती पर अवतरित किया। इसलिए गंगा को “भागीरथी” भी कहते हैं।
विष्णु चरण से उत्पत्ति: गंगा भगवान विष्णु के चरणों से निकलीं, ब्रह्मा जी के कमंडल में रहीं और शिव जी की जटाओं से धरती पर आईं – तीनों देवताओं का स्पर्श होने से यह त्रिदेवमयी हो गई।
पापहरणी: भागवत पुराण, पद्म पुराण और महाभारत में लिखा है कि गंगास्नान से सहस्रों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। मरने के बाद गंगाजल मुंह में डालने से मोक्ष मिलता है।
वैज्ञानिक कारण (आधुनिक रिसर्च)
गंगाजल में बैक्टीरियोफेज (वायरस) बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो बैक्टीरिया को मारते हैं। इसलिए गंगाजल सालों तक खराब नहीं होता।
इसमें सिल्वर आयन, ऑक्सीजन और खनिजों की विशेष मात्रा होती है।
1896 में ब्रिटिश वैज्ञानिक अर्नेस्ट हैंकिन ने साबित किया था कि गंगाजल में हैजा के कीटाणु 3 घंटे में मर जाते हैं।
आज भी CSIR-NEERI की रिपोर्ट कहती है कि गंगा का पानी स्व-शुद्धिकरण (self-purification) की अद्भुत क्षमता रखता है।
गंगाजल के साथ जरूरी नियम (इनका पालन अवश्य करें)
गंगाजल कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए – हमेशा ऊँचाई पर (पूजा स्थल में) रखें।
गंगाजल को प्लास्टिक की बोतल में लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए – तांबे, चाँदी या काँच की बोतल में रखें।
गंगाजल को फ्रिज में नहीं रखते।
घर में गंगाजल खत्म होने से पहले नया गंगाजल लाकर मिला दें – कभी खाली न होने दें।
गंदे हाथों से गंगाजल को न छुएं।
मासिक धर्म या सूतक के दौरान गंगाजल को छूना वर्जित है।
गंगाजल में कोई दूसरा पानी नहीं मिलाना चाहिए (शुद्ध ही रखें)।
गंगाजल के चमत्कारी महाउपाय (आजमाए हुए)
रोग निवारण: रोज सुबह खाली पेट 2-3 बूंद गंगाजल पीने से पेट की बीमारियाँ दूर होती हैं।
नकारात्मक ऊर्जा हटाना: घर के मुख्य द्वार पर रोज गंगाजल का छिड़काव करें।
परीक्षा/इंटरव्यू में सफलता: जाने से पहले माथे पर गंगाजल का तिलक लगाएं।
वास्तु दोष निवारण: घर के ईशान कोण में गंगाजल की छोटी शीशी रखें।
मृत्यु के बाद: मरने वाले व्यक्ति के मुंह में 5 बूंद गंगाजल डालने से आत्मा को शांति मिलती है।
बुरी नजर/भूत-प्रेत: बच्चे के तकिए के नीचे गंगाजल की छोटी शीशी रखें।
धन प्राप्ति: शुक्रवार को तुलसी के पौधे में गंगाजल चढ़ाएं और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” 11 बार जपें।
खास बात
गंगाजल कभी अशुद्ध नहीं होता, चाहे उसमें कुछ भी गिर जाए। लेकिन फिर भी हमें श्रद्धा से इसे शुद्ध रखना चाहिए।
तो अगली बार जब गंगाजल हाथ में लें, तो सिर्फ पानी न समझें – यह माँ गंगा का चरणामृत है।
