दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर हिंसक प्रदर्शन: पुलिस पर पेपर स्प्रे हमला, FIR दर्ज
दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर हिंसक प्रदर्शन: पुलिस पर पेपर स्प्रे हमला, FIR दर्ज
दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पेपर स्प्रे (चिली स्प्रे) से हमला किया। प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें 3-4 पुलिसकर्मी घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और कानून-व्यवस्था भंग करने के आरोप में FIR दर्ज कर ली है।
घटना का विवरण:
समय और जगह: रविवार शाम इंडिया गेट के पास, खासकर C-हेक्सागन इलाके में। प्रदर्शनकारी मास्क पहने प्लेकार्ड लेकर इकट्ठा हुए थे, जिन पर “स्मॉग से आजादी!” और “सांस लेना जानलेवा हो गया” जैसे नारे लिखे थे।
कारण: दिल्ली का AQI 381 तक पहुंच गया था, जो “बहुत खराब” श्रेणी में है। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार से तत्काल साफ हवा नीति बनाने की मांग कर रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में छत्तीसगढ़ में मारे गए नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के पोस्टर लगाए और “हिड़मा जिंदाबाद” जैसे नक्सली नारे लगाए।
हिंसा: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की तो उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिए और सड़क पर धरना दे दिया। इससे ट्रैफिक जाम हो गया। हटाने के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पेपर स्प्रे छिड़का, जिससे अधिकारियों की आंखों और चेहरे पर चोटें आईं। घायल पुलिसकर्मी RML अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों को C-हेक्सागन से हटा दिया गया। 6 लोगों को हिरासत में लिया गया। DCP (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला ने इसे “अभूतपूर्व” बताया, कहा कि पहली बार प्रदर्शनकारियों ने स्प्रे का इस्तेमाल किया।
FIR का विवरण:
धारा: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत (आपातकालीन मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति), सरकारी काम में बाधा डालने और निषेधाज्ञा उल्लंघन के लिए।
कहां दर्ज: नई दिल्ली जिले के कार्तव्यपथ पुलिस स्टेशन में, अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ।
अन्य: नक्सली नारों के लिए अलग से FIR दर्ज करने की योजना। पुलिस वीडियो फुटेज और बयानों की जांच कर रही है।
प्रतिक्रियाएं:
दिल्ली पुलिस: “ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी। प्रदर्शन जंतर-मंतर पर ही अनुमत है।” महला ने कहा कि कानूनी कार्रवाई जारी है।
AAP (आम आदमी पार्टी): प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने इसे “राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल” बताया। केंद्र पर आरोप लगाया कि 10 महीनों में कोई कदम नहीं उठाया। NCR मुख्यमंत्रियों और पर्यावरण मंत्रियों की इमरजेंसी बैठक की मांग की।
प्रदर्शनकारी: दिल्ली क्लीन एयर कोऑर्डिनेशन कमिटी ने कहा कि प्रदूषण की जड़ें (जैसे पराली जलाना, वाहन उत्सर्जन) पर ध्यान न देने से लोग सड़कों पर उतर आए। कुछ ने पुलिस पर दबाव डालने का आरोप लगाया।
अन्य: विपक्षी दल जैसे कांग्रेस ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पर्यावरण कार्यकर्ता विमलेंदु झा ने बच्चों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया।
पृष्ठभूमि और प्रभाव:
दिल्ली में प्रदूषण हर साल नवंबर-दिसंबर में चरम पर पहुंचता है। इस महीने की शुरुआत में भी इंडिया गेट पर प्रदर्शन हुए थे, जहां 400 से ज्यादा लोग इकट्ठे हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद जंतर-मंतर के अलावा कहीं प्रदर्शन प्रतिबंधित हैं। यह घटना स्वास्थ्य संकट को उजागर करती है, जहां बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सरकार ने इलेक्ट्रिक हीटर वितरण जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी असंतुष्ट हैं। स्थिति पर नजर रखें, क्योंकि AQI अभी भी खराब है।
