महाराष्ट्र में सियासी बवाल: अजित पवार का विवादित बयान, वोट न देने पर फंड रोकने की धमकी
महाराष्ट्र में सियासी बवाल: अजित पवार का विवादित बयान, वोट न देने पर फंड रोकने की धमकी
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार सुर्खियों में हैं। पुणे जिले के बारामती तहसील के मालेगांव में नगर पंचायत चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने मतदाताओं को संबोधित करते हुए ऐसा बयान दिया, जिसे विपक्ष ने खुली धमकी करार दिया। यह घटना शुक्रवार (22 नवंबर 2025) को हुई, जब पवार राकांपा के 18 उम्मीदवारों के समर्थन में सभा को संबोधित कर रहे थे।
बयान का पूरा विवरण:
अजित पवार ने मराठी में कहा, “तुम्हारे पास वोट हैं, मेरे पास फंड हैं। अगर तुम मेरे उम्मीदवारों को चुनोगे, तो मैं मालेगांव के लिए फंड की कोई कमी नहीं होने दूंगा। तुम्हारी हर मांग और वादे पूरे करूंगा। लेकिन अगर तुम इनकार करोगे, तो मैं भी इनकार कर दूंगा। अब तय कर लो, क्या करना है।” यह बयान वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिससे राजनीतिक हंगामा मच गया।
मालेगांव नगर पंचायत चुनाव 2 दिसंबर को होने हैं, जहां राकांपा (अजित पवार गुट) ने भाजपा समर्थित पैनल के साथ गठबंधन किया है। यह इलाका पवार परिवार का गढ़ माना जाता है, जहां अजित पवार का वित्त मंत्री के नाते प्रभाव भी है।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया:
शिवसेना (UBT): नेता अंबादास दानवे ने कहा, “फंड अजित पवार के घर से नहीं आते, ये जनता के टैक्स का पैसा है। वोटर्स को धमकाना लोकतंत्र का अपमान है। चुनाव आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
कांग्रेस: प्रवक्ता ने इसे “सत्ता के दुरुपयोग” का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे बयान से साफ है कि महायुति सरकार विकास के नाम पर वोट खरीदने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज करने की बात कही है, दावा करते हुए कि यह मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है।
अजित पवार का पक्ष:
पवार के समर्थकों ने इसे “चुनावी जोश” बताया और कहा कि यह विकास कार्यों पर जोर देने का तरीका था, न कि धमकी। खुद पवार ने बाद में सफाई दी कि उनका इरादा मतदाताओं को जागरूक करना था, ताकि वे सही फैसला लें। हालांकि, विपक्ष इसे “धमकी” ही मान रहा है।
यह बयान अजित पवार के लिए कोई नई बात नहीं है। पहले भी उनके विवादित बयानों (जैसे सितंबर में सोलापुर डीएसपी से फोन पर बात) ने सुर्खियां बटोरीं। महाराष्ट्र निकाय चुनावों के बीच यह घटना सियासी तापमान और बढ़ा रही है।
