Monday, September 14, 2026
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कुंडली मिलवाना जरूरी, लेकिन… प्रेमानंद महाराज ने ‘विचारों का मेल’ को बताया सबसे जरूरी गुण!

कुंडली मिलवाना जरूरी, लेकिन… प्रेमानंद महाराज ने ‘विचारों का मेल’ को बताया सबसे जरूरी गुण!

वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज ने हाल ही में अपने एक प्रवचन में विवाह के लिए कुंडली मिलान के महत्व पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हां, पारंपरिक विवाह में कुंडली बनवाना और गुण मिलाना उपयोगी है, लेकिन यह अकेला पर्याप्त नहीं। असली कुंजी है ‘विचारों और व्यवहार का मेल’ – यानी दोनों पक्षों के विचार एक-दूसरे से मैच करें। महाराज जी ने जोर देकर कहा, “कुंडली मिली फिर भी झगड़ा हो जाता है, क्योंकि शांति गुणों से नहीं, विचारों के सामंजस्य से मिलती है।” यह बात 21 नवंबर 2025 को वायरल हुए उनके प्रवचन से सामने आई, जहां एक भक्त ने पूछा था कि क्या कुंडली मिलान बिना विवाह संभव है? आइए, महाराज जी की इस सीख को विस्तार से समझें।

कुंडली मिलान क्या है और क्यों जरूरी?

हिंदू परंपरा में विवाह से पहले लड़का-लड़की की जन्मकुंडली (जन्म पत्री) का मिलान अष्टकूट पद्धति से किया जाता है। इसमें चंद्रमा की स्थिति के आधार पर 8 कोट्स (वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी) के 36 गुणों का आकलन होता है:

18 से कम गुण: विवाह में बाधा, दोष (जैसे मंगल दोष) की जांच जरूरी।

18-24 गुण: सामान्य, सावधानी बरतें।

24-32 गुण: अच्छा, सुखी जीवन की संभावना।

32+ गुण: उत्तम, लेकिन महाराज जी के अनुसार, यह गारंटी नहीं।

प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट किया कि विवाह जैसे संस्कार के लिए कुंडली मिलाना शास्त्रीय रूप से जरूरी है, खासकर अरेंज्ड मैरिज में। लेकिन आज के दौर में लव मैरिज और लिव-इन रिलेशनशिप में लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। फिर भी, वे कहते हैं, “ब्याह-व्याह करना हो तो जरूरी तो है ही,” लेकिन अगर गुण न मिलें तो ईश्वर को साक्षी मानकर आगे बढ़ें – ग्रह भी शुभ हो जाएंगे।

प्रेमानंद महाराज ने ‘विचारों का मेल’ को क्यों बताया सबसे जरूरी गुण?

महाराज जी के प्रवचन का मुख्य संदेश यह है कि 36 गुण मिलने के बावजूद वैवाहिक जीवन में कलह हो सकती है, अगर पति-पत्नी के विचार न मिलें। उन्होंने उदाहरण दिया:

कुंडली मिली, लेकिन झगड़ा क्यों? क्योंकि गुण तो ज्योतिषीय हैं, लेकिन दांपत्य सुख विचारों, समझदारी और व्यवहार के सामंजस्य पर टिका है। “शांति तब मिलती है जब दोनों एक-दूसरे को समझें, न कि सिर्फ तारों से।”

आज का दौर: प्रेम विवाह में गुण मिलान कम होता है, लेकिन महाराज जी कहते हैं, “कौन आजकल गुण देख रहा है? प्रेम है तो ईश्वर है।” फिर भी, विचारों का मेल न होने से रिश्ते टूटते हैं।

सलाह: कुंडली मिलाओ, लेकिन सबसे पहले चरित्र, मूल्य और जीवन लक्ष्यों का मिलान करो। सन्यासी बनना हो तो कुंडली की जरूरत ही नहीं!

यह सीख न सिर्फ विवाह के लिए, बल्कि हर रिश्ते के लिए प्रासंगिक है। ज्योतिष गुण दोष बताता है, लेकिन भक्ति और समझदारी जीवन चलाती है।

विवाह के लिए क्या करें? प्रेमानंद महाराज की 5 व्यावहारिक सलाहें

कुंडली जरूर मिलवाएं: अरेंज्ड मैरिज में 18+ गुण देखें, दोष निवारण करवाएं।

विचारों पर फोकस: बातचीत से पता लगाएं – क्या दोनों का स्वभाव, धार्मिकता और परिवार के प्रति नजरिया एक है?

ईश्वर को साक्षी मानें: गुण कम हों तो भगवान को समर्पित कर विवाह करें; विपरीत ग्रह भी शुभ फल देंगे।

प्रेम को मजबूत बनाएं: लव मैरिज में ज्योतिष से ज्यादा विश्वास और संवाद जरूरी।

प्रवचन सुनें: महाराज जी के सत्संग (YouTube/सोशल मीडिया पर उपलब्ध) से जीवन के रहस्य सीखें।

प्रेमानंद महाराज की यह बात दिल को छू गई है – कुंडली नक्षत्र दिखाती है, लेकिन सच्चा मेल दिल से होता है। अगर आप विवाह की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले विचारों का गुण मिलान करें। उनके प्रवचन के लिए ‘Premanand Maharaj Official’ चैनल चेक करें। सुखी दांपत्य जीवन की शुभकामनाएं! भक्ति में लीन रहें।

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