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Zepto CEO ने स्वीकारा: डार्क पैटर्न हमारी गलती थी, अब हटाए गए – लेकिन इससे ग्राहकों को कैसे होता है भारी नुकसान?

Zepto CEO ने स्वीकारा: डार्क पैटर्न हमारी गलती थी, अब हटाए गए – लेकिन इससे ग्राहकों को कैसे होता है भारी नुकसान?

क्विक कॉमर्स ऐप Zepto के को-फाउंडर और CEO आदीत पालीचा ने हाल ही में Forbes India को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया कि ऐप पर इस्तेमाल किए गए ‘डार्क पैटर्न’ एक बड़ी गलती थी। उन्होंने कहा, “यह हमारी चूक थी। हमने इसे तुरंत हटा दिया। दोबारा ऐसा नहीं होगा।” यह बयान जून 2025 में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के दिशानिर्देशों के बाद आया, जब Zepto सहित कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर छिपे शुल्क, भ्रामक डिस्काउंट और ऑटो-सब्सक्रिप्शन जैसे प्रैक्टिसेज के आरोप लगे। पालीचा ने माना कि सोशल मीडिया पर मिली नकारात्मक फीडबैक वैध थी, और कंपनी ने 45-60 दिनों में डिलीवरी फीस, हैंडलिंग चार्ज, सरचार्ज और कन्वीनियंस फी जैसी चीजें हटा दीं। लेकिन सवाल यह है – डार्क पैटर्न क्या हैं, और ये ग्राहकों के लिए ‘बड़ा नुकसान’ कैसे पैदा करते हैं? आइए समझें।

डार्क पैटर्न क्या हैं? सरल शब्दों में

डार्क पैटर्न यूजर इंटरफेस (UI) के वे छिपे ट्रिक्स हैं, जो कंपनियां ग्राहकों को धोखे से ज्यादा खरीदारी या सब्सक्रिप्शन करवाने के लिए इस्तेमाल करती हैं। ये मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का फायदा उठाते हैं, जैसे जल्दबाजी या FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट)। भारत में 30 नवंबर 2023 को जारी CCPA गाइडलाइंस में 13 ऐसे पैटर्न्स को बैन किया गया है। ये ‘डिजाइन ट्रिक्स’ लगते हैं, लेकिन असल में अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस हैं।

Zepto में कैसे दिखे ये पैटर्न्स? CEO ने क्या माना?

छिपे शुल्क: चेकआउट पर अचानक ‘हैंडलिंग फी’ या ‘सरचार्ज’ जोड़ना, जो पहले नहीं दिखता। Zepto ने इसे ‘प्राइसिंग एक्सपेरिमेंट’ बताया, लेकिन ग्राहक इसे छिपा चार्ज मानते थे।

भ्रामक डिस्काउंट: MRP मैनिपुलेशन या सेलेक्टिव प्राइसिंग, जहां ऐप पर कीमत कम लगती है लेकिन रियल में ज्यादा। उदाहरण: iPhone यूजर्स को प्रीमियम प्राइसिंग।

ऑटो-अडेड सब्सक्रिप्शन: ‘फ्री डिलीवरी’ के नाम पर ऑटो सब्सक्राइब, जो कैंसल करना मुश्किल।

CEO का बयान: पालीचा ने कहा, “कुछ शिकायतें (जैसे एक्सपायर्ड प्रोडक्ट) बढ़ा-चढ़ाकर कही गईं, लेकिन डार्क पैटर्न वैलिड थे। हमने इसे सॉल्व कर लिया।” कंपनी ने स्वेच्छा से बदलाव किया, बिना सरकारी दबाव के।

डार्क पैटर्न से ग्राहकों को ‘बड़ा नुकसान’ कैसे होता है?

ये पैटर्न सिर्फ ‘छोटी चाल’ नहीं, बल्कि लंबे समय में भारी नुकसान पहुंचाते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स के अनुसार, ये डिजिटल मार्केट में कंज्यूमर वेल-बीइंग को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं:

फाइनेंशियल लॉस: छिपे फीस से हर ऑर्डर पर ₹20-50 एक्स्ट्रा। सालाना 10 ऑर्डर/महीना करने वाले को ₹2,400-6,000 का नुकसान। सब्सक्रिप्शन कैंसल न होने पर महीने का ₹99-199।

टाइम वेस्ट: कैंसलेशन या रिफंड के लिए घंटों स्ट्रगल। एक सर्वे में 70% यूजर्स ने कहा कि ये पैटर्न स्ट्रेस बढ़ाते हैं।

ट्रस्ट ब्रेक: बार-बार धोखा मिलने से ऐप्स पर भरोसा कम। Zepto के केस में सोशल मीडिया पर #BoycottZepto ट्रेंड हुआ।

डेटा मिसयूज: ज्यादा सब्सक्रिप्शन से पर्सनल डेटा शेयर, जो स्पैम या फ्रॉड का कारण बनता है।

मनोवैज्ञानिक इफेक्ट: ‘बजट ओवररन’ से गिल्ट या एंग्जायटी। खासकर युवा और लो-इनकम ग्राहकों पर असर।

उदाहरण: Zepto पर ₹99 का आर्डर रखते ही ‘फ्री डिलीवरी’ के लिए सब्सक्राइब हो जाना, जो अगले महीने बिल में दिखे – ये ‘नाग’ पैटर्न है, जहां कैंसल बटन छोटा/छिपा होता है।

अब Zepto ने क्या बदला? और आगे क्या?

रोल बैक: सभी छिपे फीस हटाए, चेकआउट क्लीन किया। अब फ्री डिलीवरी ₹99+ पर ऑटो-अप्लाई, बिना सब्सक्रिप्शन।

गवर्नमेंट कंप्लायंस: Zepto समेत 25+ ऐप्स ने CCPA को ‘नो डार्क पैटर्न’ डिक्लेरेशन सबमिट किया।

CEO का वादा: “हम कस्टमर-सेंट्रिक हैं। फीडबैक से सीखा।” लेकिन X (ट्विटर) पर यूजर्स सतर्क हैं – “ट्रस्ट रिबिल्ट या बेहतर छिपाया?”

ग्राहक के तौर पर सावधानियां: नुकसान से बचें

चेकआउट स्कैन करें: हर फीस पढ़ें, ऑटो-ऑप्शन्स ऑफ करें।

रिव्यूज चेक: ऐप डाउनलोड से पहले Play Store रिव्यूज देखें।

कैंसलेशन टेस्ट: सब्सक्रिप्शन लेने से पहले कैंसल प्रोसेस चेक करें।

CCPA रिपोर्ट: शिकायत के लिए consumerhelpline.gov.in पर जाएं।

ऐल्टरनेटिव यूज: Zepto, Blinkit या Swiggy Instamart – तुलना करें, जहां ट्रांसपेरेंसी ज्यादा हो।

यह मामला ई-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए सबक है – ग्रोथ के चक्कर में कस्टमर ट्रस्ट मत खोएं। Zepto ने गलती मानी, जो सराहनीय है, लेकिन असली बदलाव यूजर्स की नजरों में होगा। अगर आपको भी ऐसा अनुभव हुआ, तो कमेंट में शेयर करें। स्मार्ट शॉपिंग करें, सुरक्षित रहें!

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