नेपाल का Gen-Z फिर सड़कों पर: 70 दिन बाद भड़की आग, बाराके में भिड़ंत से कर्फ्यू, ओली समर्थकों पर हमला
नेपाल का Gen-Z फिर सड़कों पर: 70 दिन बाद भड़की आग, बाराके में भिड़ंत से कर्फ्यू, ओली समर्थकों पर हमला
नेपाल की सड़कों पर एक बार फिर Gen-Z का गुस्सा फूट पड़ा है। सितंबर में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ चले 3 दिवसीय आंदोलन ने प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को कुर्सी से हटा दिया था, लेकिन 70 दिन बाद युवा फिर गरम हो गए। बाराके जिले के सिमरा में Gen-Z प्रदर्शनकारियों और ओली की पार्टी CPN-UML के कैडरों के बीच बुधवार को भारी झड़प हुई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया। काठमांडू से लेकर पोखरा तक तनाव फैल गया है, और विशेषज्ञ इसे ‘अधूरी क्रांति’ का नया दौर बता रहे हैं।
सितंबर 2025 में शुरू हुए Gen-Z आंदोलन ने नेपाल को हिला दिया था। 9 सितंबर को काठमांडू के मैतिघर मंडला से शुरू हुई विरोध प्रदर्शन भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ थीं। युवाओं ने डिस्कॉर्ड और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर संगठित होकर संसद पर हमला बोला, जिसमें 70 से ज्यादा लोग मारे गए। आगजनी में संसद, सुप्रीम कोर्ट और कई सरकारी इमारतें जल गईं। ओली सरकार ने कर्फ्यू लगाया, लेकिन सेना ने कंट्रोल ले लिया। इसके बाद पूर्व चीफ जस्टिस सुशिला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया—नेपाल की पहली महिला पीएम। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग कर 5 मार्च 2026 को नए चुनाव की घोषणा की।
लेकिन शांति ज्यादा टिकी नहीं। 70 दिन बाद, 19 नवंबर को बाराके (भारत सीमा से सटा जिला) में तनाव भड़का। CPN-UML के नेता सिमरा एयरपोर्ट पर पहुंचे, तो Gen-Z युवा विरोध में इकट्ठा हो गए। झड़प में पथराव, लाठियां और आगजनी हुई। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी UML कैडरों पर हमला कर रहे थे, जो संसद बहाली की मांग कर रहे हैं। कर्फ्यू रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक लगाया गया, और इंटरनेट पर फिर पाबंदी की आशंका है। बुटवल, भैरहवा, इटहरी और दमक जैसे शहरों में भी अलर्ट है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “ओली की पार्टी वापस आ रही है, हमारी क्रांति को कुचलने के लिए। हम दोबारा सड़कों पर उतरेंगे।”
Gen-Z का गुस्सा अब सिर्फ सितंबर की मौतों का बदला नहीं, बल्कि गहरी निराशा का प्रतीक है। नेपाल की अर्थव्यवस्था ठप है—बेरोजगारी 40% युवाओं को प्रभावित कर रही है, भ्रष्टाचार सूचकांक में देश 108वें स्थान पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने सुधारों में देरी की, जिससे युवा फिर भड़क उठे। हार्वर्ड के एक विश्लेषण में इसे “दक्षिण एशिया में Gen-Z क्रांति का चक्र” कहा गया, जो बांग्लादेश और श्रीलंका से प्रेरित है। X (पूर्व ट्विटर) पर #GenZRevolutionNepal ट्रेंड कर रहा है, जहां युवा डिस्कॉर्ड सर्वर पर रणनीति बना रहे हैं।
भारत ने चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं। भारतीय नागरिक कर्फ्यू का पालन करें।” नेपाल-भारत सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अंतरिम पीएम कार्की ने अपील की, “शांति बनाए रखें, चुनाव नजदीक हैं।” लेकिन UML की मांग—संसद बहाली—से टकराव बढ़ सकता है। क्या यह आंदोलन नई सरकार गिराएगा या लोकतंत्र को मजबूत करेगा? नेपाल की सड़कें फिर जवाब देंगी।
