उत्तराखंड

उत्तराखंड में 6 महीने तक हड़ताल पर रोक: ESMA लागू, सार्वजनिक हित और आवश्यक सेवाओं की वजह से!

उत्तराखंड में 6 महीने तक हड़ताल पर रोक: ESMA लागू, सार्वजनिक हित और आवश्यक सेवाओं की वजह से!

उत्तराखंड सरकार ने राज्य भर की सरकारी सेवाओं में हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कार्मिक विभाग के सचिव शैलेश बागौली ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आवश्यक सेवाएं रखरखाव अधिनियम, 1966 (उत्तराखंड में लागू) की धारा 3(1) के तहत अधिसूचना जारी की। इस आदेश के तहत अगले 6 महीने (19 नवंबर 2025 से 18 मई 2026 तक) कोई भी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी या विभाग हड़ताल, धरना या किसी भी रूप में काम बंद नहीं कर सकेगा। उल्लंघन करने पर 1 साल तक की जेल या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

ESMA क्या है और क्यों लगाया गया?

ESMA (Essential Services Maintenance Act) एक आपातकालीन कानून है, जो आवश्यक सेवाओं (जैसे स्वास्थ्य, बिजली, पानी, परिवहन, शिक्षा आदि) को सुचारू रखने के लिए हड़तालों पर रोक लगाता है। उत्तराखंड सरकार ने इसे ‘सार्वजनिक हित’ (public interest) और ‘आवश्यक सेवाओं की निरंतरता’ (essential service requirements) के मद्देनजर लागू किया है। अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि राज्य के कई विभागों में महत्वपूर्ण जन-संपर्क वाले कार्य चल रहे हैं, जिनमें कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए।

मुख्य वजहें:

पर्यटन और तीर्थयात्रा का मौसम: उत्तराखंड दुनिया का प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्र है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु चार धाम यात्रा, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और अन्य स्थलों पर आते हैं। नवंबर से ही चार धाम यात्रा का प्रारंभिक चरण शुरू हो जाता है, और सर्दियों में सड़कें, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं और परिवहन व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए ESMA जरूरी बताया गया। मंगलवार को ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के ISBT का औचक निरीक्षण किया, जहां उन्होंने बस संचालन, टिकट काउंटर, वेटिंग हॉल, पेयजल, शौचालय, दुकानें और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। धामी ने कहा, “उत्तराखंड में करोड़ों पर्यटक आते हैं, इसलिए सभी ट्रांसपोर्ट हब में सफाई और सेवा का उच्च स्तर बनाए रखना होगा।”

मानसून के बाद मरम्मत कार्य: मानसून (जुलाई-सितंबर) के बाद सड़कें, पुल, बांध और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। हड़ताल से ये कार्य रुक सकते हैं, जो विकास को प्रभावित करेगा।

आवश्यक सेवाओं की सुरक्षा: स्वास्थ्य, बिजली, जल आपूर्ति और शिक्षा जैसी सेवाओं में कोई व्यवधान न हो। राज्य में पहले भी ESMA लगाया गया है – जैसे 2023 में लोकसभा चुनाव से पहले, 2021 में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल रोकने के लिए, 2020 में कोविड के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों पर, और 2023 में चार धाम यात्रा के समय।

कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया:

उत्तराखंड राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने ESMA को ‘कर्मचारियों के अधिकारों का हनन’ बताया। अध्यक्ष हरभजन सिंह चौहान ने कहा, “यह कानून केवल तब लगाना चाहिए जब वाकई खतरा हो। हमारी मांगें जैसे महंगाई भत्ता वृद्धि और पेंशन सुधार पर बातचीत होनी चाहिए।” हालांकि, सरकार ने कहा कि ESMA के दौरान भी वार्ता जारी रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य की बढ़ती पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए है। उत्तराखंड में 2024 में रिकॉर्ड 5 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आए थे, और 2025 में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। ESMA से सेवाओं में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन कर्मचारियों में असंतोष बढ़ सकता है। क्या यह फैसला सही है? बहस जारी है!

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