दिल्ली ब्लास्ट केस: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी को ED ने गिरफ्तार किया, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग की जांच तेज
दिल्ली ब्लास्ट केस: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी को ED ने गिरफ्तार किया, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग की जांच तेज
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लिया है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी (जावाद अहमद सिद्दीकी के रूप में भी जाना जाता है) को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत की गई है। ED की जांच में संदेह है कि यूनिवर्सिटी से जुड़े शेल कंपनियों के जरिए लॉन्डर्ड फंड आतंकी गतिविधियों, खासकर ब्लास्ट के आरोपी डॉक्टरों को फंडिंग के लिए इस्तेमाल हुए। गिरफ्तारी दिल्ली और एनसीआर में 25 लोकेशंस पर छापेमारी के दौरान हुई, जहां 9 शेल कंपनियां सामने आईं।
जावेद अहमद सिद्दीकी, 61 वर्षीय, अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं, जो फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी और 9 अन्य संस्थाओं का संचालन करता है। ब्लास्ट में मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी और मुजम्मिल गनई इसी यूनिवर्सिटी के एम्प्लॉयी थे। ED ने मंगलवार को ओखला स्थित ट्रस्ट मुख्यालय और यूनिवर्सिटी प्रेमिसेज पर दबिश दी, जहां से फंडिंग के दस्तावेज, फर्जी एकाउंट्स और हवाला ट्रांजेक्शंस के सबूत बरामद हुए। जांच एजेंसी का मानना है कि UGC और NAAC की शिकायत पर दर्ज दो FIRs में धोखाधड़ी और जालसाजी के अलावा आतंकी फंडिंग का लिंक है। सिद्दीकी को 2000 में दिल्ली पुलिस ने हलाल इनवेस्टमेंट स्कीम्स से 7.5 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
ED के एक अधिकारी ने बताया, “शेल कंपनियां एक ही एड्रेस पर रजिस्टर्ड हैं, जहां कोई फिजिकल प्रेजेंस नहीं। इनके जरिए फंड डायवर्जन और लेयरिंग हुई। यूनिवर्सिटी के प्रमोटर्स की कंपनियां—जैसे अल-फलाह एजुकेशन सर्विस, इनवेस्टमेंट लिमिटेड और एक्सपोर्ट्स—में सिद्दीकी परिवार के सदस्य डायरेक्टर्स हैं।” छापेमारी में सिद्दीकी के भाई हमूद अहमद सिद्दीकी को भी हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया, जो 25 साल से फ्रॉड केसों में फरार था। मध्य प्रदेश के मांझू में 2000 के तीन केसों में 35 लाख की ठगी का आरोपी हमूद को तेलंगाना पुलिस ने पकड़ा।
ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए थे। आरोपी उमर नबी ने जेईएम (जैश-ए-मोहम्मद) से जुड़कर सुसाइड बॉम्बिंग की प्लानिंग की थी। अल-फलाह यूनिवर्सिटी की AIU मेंबरशिप रद्द हो चुकी है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने सिद्दीकी को दो समन जारी किए थे, लेकिन वे फरार थे। ED ने PMLA के तहत फॉरेंसिक ऑडिट ऑर्डर किया है, जिसमें फंडिंग का आतंकी लिंक साबित करने पर संपत्ति जब्ती हो सकती है।
यह गिरफ्तारी दिल्ली ब्लास्ट के बाद आतंकी फंडिंग नेटवर्क पर ED की क्रैकडाउन का हिस्सा है। विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक साजिश’ कहा, जबकि गृह मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी’ बताया। जांच जारी है, और ज्यादा गिरफ्तारियां संभव हैं।
