राजनीति

‘पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने लालू’: RJD की हार पर शिवानंद तिवारी का तीखा प्रहार, तेजस्वी को ‘सपनों का राजकुमार’ कहा

‘पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने लालू’: RJD की हार पर शिवानंद तिवारी का तीखा प्रहार, तेजस्वी को ‘सपनों का राजकुमार’ कहा

बिहार विधानसभा चुनाव में RJD की करारी हार के बाद पार्टी में आंतरिक कलह ने जोर पकड़ लिया है। पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और लालू प्रसाद यादव के पुराने सहयोगी शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लालू परिवार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने लालू को ‘पुत्र मोह में धृतराष्ट्र’ बताते हुए कहा कि वे बेटे तेजस्वी यादव के लिए ‘राज सिंहासन गर्म’ कर रहे थे, जबकि तेजस्वी ‘सपनों की दुनिया’ में मुख्यमंत्री बनने का स्वप्न देख रहे थे। तिवारी ने RJD की ‘दुर्गति’ के लिए लालू और तेजस्वी को सीधे जिम्मेदार ठहराया, जिससे पार्टी में हड़कंप मच गया।

तिवारी की पोस्ट चुनाव नतीजों के दो दिन बाद आई है, जब महागठबंधन को महज 35 सीटें मिलीं, जबकि NDA ने 202 सीटें हासिल कर सरकार बना ली। तिवारी ने लिखा, “लालू यादव पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बन चुके हैं। तेजस्वी तो सपनों की दुनिया में मुख्यमंत्री का शपथ ले रहा था। मैं उसके सपनों में विघ्न डाल रहा था। अब मैं मुक्त हो चुका हूं।” उन्होंने बिहार आंदोलन के दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि लालू जेल में भी छोटी महत्वाकांक्षाओं के साथ थे, लेकिन अब परिवारवाद ने पार्टी को तबाह कर दिया। तिवारी ने तेजस्वी को ‘राजकुमार’ कहकर घेरा, जो पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रहा है।

शिवानंद तिवारी का RJD से पुराना नाता है। 1970 के दशक में वे लालू के साथ जेल गए थे, और 2019 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। लेकिन 2020 में पार्टी से निष्कासित होने के बाद वे आलोचक बन गए। हाल ही में उन्होंने शरद यादव के बेटे शांतनु को टिकट न देने पर लालू को ‘कर्जदार’ बताया था। अब यह पोस्ट RJD के लिए झटका है, खासकर जब रोहिणी आचार्य का परिवारिक विवाद पहले ही सुर्खियों में है। तिवारी ने कहा, “पार्टी की दुर्गति लालू के पुत्र मोह की देन है। तेजस्वी को हकीकत से जोड़ना जरूरी था, लेकिन परिवार ने सब कुर्बान कर दिया।”

RJD ने तिवारी के बयान पर चुप्पी साध रखी है। प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “यह व्यक्तिगत राय है, पार्टी एकजुट है।” लेकिन सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “तिवारी ने सच्चाई बोल दी, परिवारवाद RJD का कब्र खोद रहा।” राजनीतिक विश्लेषक रणदीप सिंह ने कहा, “यह पोस्ट RJD के पुनर्निर्माण की मांग को दर्शाती है। लालू को अब संगठन पर फोकस करना चाहिए।” विपक्षी NDA ने इसे ‘RJD का अंत’ बताया। भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने ट्वीट किया, “धृतराष्ट्र की कथा दोहरा रही RJD। जनता ने फैसला सुना दिया।”

यह विवाद बिहार की सियासत को नया रंग दे रहा है। 20 नवंबर को नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण से पहले RJD में सुधार की गुंजाइश है, लेकिन तिवारी जैसे दिग्गजों का विद्रोह पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। क्या लालू परिवार संभलेगा या यह कलह और गहराएगी? फिलहाल, तिवारी की ‘खरी-खरी’ ने RJD को आईना दिखा दिया है।

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